भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के दुर्ग-तरोकी सेक्शन में 226 करोड़ रुपए की सिग्नलिंग परियोजना को दी मंजूरी

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नई दिल्ली, 1 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने बुधवार को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के रायपुर डिवीजन के दुर्ग-तरोकी सेक्शन पर सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए 226 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना रेलवे परिचालन को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस परियोजना के तहत सेक्शन के 13 स्टेशनों पर मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग (पीआई) प्रणाली को हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली स्थापित की जाएगी। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव से ट्रेन संचालन अधिक…

नई दिल्ली, 1 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने बुधवार को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के रायपुर डिवीजन के दुर्ग-तरोकी सेक्शन पर सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए 226 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना रेलवे परिचालन को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस परियोजना के तहत सेक्शन के 13 स्टेशनों पर मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग (पीआई) प्रणाली को हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली स्थापित की जाएगी। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव से ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित, स्वचालित और तकनीकी रूप से उन्नत होगा।

रेल मंत्रालय ने कहा कि इस परियोजना के तहत मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग सिस्टम को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदला जाएगा, जिससे ट्रेन संचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

इस परियोजना में मरौदा, रिसामा, गुंडरदेही, लाटाबोड़, बालोद, कुसुमकसा, दल्ली राजहरा, गुदुम, भानुप्रतापपुर, केवटी, अंतागढ़, तरोकी और रायपुर स्टोर डिपो सहित कुल 13 स्टेशनों को शामिल किया गया है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, पैनल इंटरलॉकिंग से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली में बदलाव के बाद इस महत्वपूर्ण रेलखंड की सिग्नलिंग व्यवस्था पूरी तरह आधुनिक हो जाएगी, जिससे परिचालन में अधिक लचीलापन और सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली है, जो ट्रेनों के लिए मार्ग निर्धारण (रूट सेटिंग) और सिग्नल संचालन को स्वचालित तरीके से नियंत्रित करती है, जिसमें कई अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान भी शामिल होते हैं।

पारंपरिक पैनल इंटरलॉकिंग की तुलना में यह प्रणाली अधिक भरोसेमंद, लचीली और तकनीकी रूप से सक्षम मानी जाती है। किसी भी व्यवधान की स्थिति में सेवाओं को तेजी से बहाल करने में भी यह प्रणाली अधिक प्रभावी होती है।

रेल मंत्रालय का कहना है कि इस परियोजना से ट्रेन संचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता में सुधार होगा, ट्रेनों की समयपालन (पंक्चुअलिटी) बेहतर होगी और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते यात्री एवं माल यातायात को अधिक कुशलता से संभालने में मदद मिलेगी।

भारतीय रेलवे के अनुसार, यह परियोजना देश भर में रेलवे सिग्नलिंग प्रणाली को आधुनिक तकनीक से लैस करने के व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य रेलवे नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और दक्ष बनाना है।

मंत्रालय ने बताया कि नई प्रणाली लागू होने से सिग्नलिंग संबंधी तकनीकी खराबियां कम होंगी, ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित होगी और बढ़ते यात्री तथा माल परिवहन की मांग को भविष्य में बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।

–आईएएनएस

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