कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद के बीच दो पूर्व मंत्रियों का असहमति वाला वीडियो आया सामने

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बेंगलुरु, 6 अगस्त (आईएएनएस)। हाल ही में हुए कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस द्वारा पार्टी के भीतर असंतोष को नियंत्रित करने के प्रयासों को गुरुवार को एक और झटका लगा। दो वरिष्ठ पार्टी नेताओं के बीच हुई आंतरिक बातचीत के सार्वजनिक होने से विवाद और गहरा गया। वहीं, नए राजनीतिक घटनाक्रमों ने संकेत दिया कि सत्तारूढ़ दल के भीतर नाराजगी अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है। पूर्व मंत्रियों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं एच.के. पाटिल तथा दिनेश गुंडू राव के बीच हुई एक बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पाटिल के आवास पर…

बेंगलुरु, 6 अगस्त (आईएएनएस)। हाल ही में हुए कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस द्वारा पार्टी के भीतर असंतोष को नियंत्रित करने के प्रयासों को गुरुवार को एक और झटका लगा। दो वरिष्ठ पार्टी नेताओं के बीच हुई आंतरिक बातचीत के सार्वजनिक होने से विवाद और गहरा गया। वहीं, नए राजनीतिक घटनाक्रमों ने संकेत दिया कि सत्तारूढ़ दल के भीतर नाराजगी अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है।

पूर्व मंत्रियों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं एच.के. पाटिल तथा दिनेश गुंडू राव के बीच हुई एक बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पाटिल के आवास पर हुई इस बातचीत में दोनों नेता मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के चयन के लिए अपनाए गए मानदंडों पर चर्चा करते नजर आए।

कथित बातचीत में एक नेता यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि मंत्रियों के चयन के लिए किस आधार का इस्तेमाल किया गया, यह समझना मुश्किल है। वीडियो में नेता कहते सुनाई दे रहे हैं, “चयन किस मानदंड पर किया गया? मुझे नहीं पता कि कौन से मानक अपनाए गए। मैंने पहली बार ऐसा कुछ देखा है। नए मानदंड अपनाए गए हैं और मैं चयन के आधार को समझ नहीं पा रहा हूं।”

इस दौरान एच.के. पाटिल मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं। यह वीडियो ऐसे समय में कांग्रेस नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, जब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, एआईसीसी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले नेताओं को मनाने में जुटे हुए हैं।

एच.के. पाटिल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने विवाद को कमतर दिखाने की कोशिश करते हुए कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार अब “बंद अध्याय” है। उन्होंने कहा, “हम कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। विधायक के तौर पर हमारी प्राथमिकता अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों का विकास करना जारी रहेगी।” गुंडू राव ने कहा कि वह पाटिल से मिलने इसलिए गए थे क्योंकि वे पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।

उन्होंने बताया कि एक दिन पहले वह उनसे विस्तार से चर्चा नहीं कर सके थे, क्योंकि बी.के. हरिप्रसाद सहित कई अन्य कांग्रेस नेता भी पाटिल के घर पहुंचे हुए थे। असंतुष्ट नेताओं से बातचीत और उन्हें मनाने के पार्टी नेतृत्व के प्रयासों को सकारात्मक कदम बताते हुए गुंडू राव ने कहा कि ब्राह्मण समुदाय द्वारा मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व की मांग करना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने कहा, “नए मंत्रिमंडल में कई समुदायों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। पहले ऐसी स्थिति नहीं बनी थी।”

उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अपने विचार उन्होंने बी.के. हरिप्रसाद के सामने रखे हैं। इस बीच, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एएचआईएनडीए (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित) समूह से जुड़े विधायकों में भी असंतोष बना हुआ है। बताया जा रहा है कि वे चयन प्रक्रिया से नाराज हैं।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एच.सी. महादेवप्पा गुरुवार को नई दिल्ली रवाना हुए और उनके पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने की संभावना है। यह घटनाक्रम उन खबरों के बीच सामने आया है, जिनमें कहा गया है कि मंत्रिमंडल विस्तार पर सुरजेवाला के साथ हुई चर्चाओं के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा सुझाए गए नामों की सूची को लेकर कई नेता नाराज हैं।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुछ विधायकों का मानना है कि सिद्धारमैया ने सीमित संख्या में नामों की ही सिफारिश की जबकि उनके कई करीबी सहयोगियों और समर्थकों को अंतिम सूची में जगह नहीं मिली, जिससे उनके गुट में नाराजगी पैदा हुई है।

सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले महादेवप्पा पहले भी कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सार्वजनिक रूप से अलग रुख अपना चुके हैं। उन्होंने सिद्धारमैया के कार्यकाल के दौरान अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री पद सृजित करने की भी वकालत की थी।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि असंतुष्ट विधायकों को लगता है कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सिद्धारमैया ने पार्टी आलाकमान के सामने उनके दावों को मजबूती से नहीं रखा।

कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों से विरोध, इस्तीफे और असंतोष की आवाजें लगातार सामने आने के बीच कांग्रेस नेतृत्व के सामने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी में एकजुटता बहाल करना बड़ी चुनौती बन गया है, जबकि वरिष्ठ नेता लगातार बगावत को शांत करने के प्रयास कर रहे हैं।

–आईएएनएस

पीएम

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