केरल के नए सीएम की दौड़ अंतिम चरण में, एआईसीसी पर्यवेक्षकों ने ‘समर्थन सूची’ लीक होने की बात खारिज की

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नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, 8 मई (आईएएनएस)। केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर सस्पेंस गहराने के साथ ही, कांग्रेस आलाकमान ने विचार-विमर्श के निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है। यह कदम तब उठाया गया जब एआईसीसी पर्यवेक्षकों ने शुक्रवार को नई दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने केरल में नए चुने गए विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी चर्चा पूरी करने के बाद, खड़गे के आवास पर व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट सौंपी। जानकारी के अनुसार, पर्यवेक्षकों ने हाई कमान को बताया है कि राज्य में राजनीतिक…

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, 8 मई (आईएएनएस)। केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर सस्पेंस गहराने के साथ ही, कांग्रेस आलाकमान ने विचार-विमर्श के निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है। यह कदम तब उठाया गया जब एआईसीसी पर्यवेक्षकों ने शुक्रवार को नई दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी।

पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने केरल में नए चुने गए विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी चर्चा पूरी करने के बाद, खड़गे के आवास पर व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट सौंपी।

जानकारी के अनुसार, पर्यवेक्षकों ने हाई कमान को बताया है कि राज्य में राजनीतिक स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है और अंतिम चरण तक भी जोरदार लॉबिंग और गुटों का दबाव जारी रहा। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के बारे में घोषणा अब रविवार तक होने की उम्मीद है।

माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट तीन जरूरी बातों का आकलन करने के बाद तैयार की गई है, विधायक के बीच अलग-अलग दावेदारों को मिला सपोर्ट, अलायंस पार्टनर्स का स्टैंड और जनता का मौजूदा मूड।

अजय माकन ने बताया कि रिपोर्ट पर चर्चा शुरू हो चुकी है और साफ किया कि लीडरशिप आखिरी फैसले में बेवजह देरी नहीं करेगी।

जैसे ही हाईकमान ने बातचीत शुरू की, मीडिया के कुछ हिस्सों में फैली तस्वीरों और लिस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया, जिसमें लीडरशिप कंसल्टेशन के दौरान कांग्रेस विधायक के समर्थन की स्थिति का खुलासा करने का दावा किया गया था।

लीक हुई तस्वीरों ने जोरदार राजनीतिक बहस छेड़ दी, जिसमें अलग-अलग ग्रुप अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए मोमेंटम दिखाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, मुकुल वासनिक ने सर्कुलेट किए गए डॉक्यूमेंट्स के असली होने से साफ इनकार कर दिया।

उन्होंने साफ किया कि जो तस्वीरें शेयर की जा रही हैं, वे ऑब्जर्वर द्वारा तैयार किए गए असली या फाइनल रिकॉर्ड नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे कंसल्टेशन के असली नतीजे को नहीं दिखाती हैं।

वासनिक के अनुसार, जो चीजें पब्लिक में सामने आईं, वे सिर्फ ऑब्जर्वर के पास मौजूद कागजों की तस्वीरें थीं, न कि कांग्रेस प्रेसिडेंट को दिया गया ऑफिशियल असेसमेंट। यह विवाद तब और गहरा गया जब उडुमा से विधायक-इलेक्ट के नीलकंदन ने ऑब्जर्वर से शिकायत की कि लीक हुई लिस्ट में उनकी बात को गलत तरीके से दिखाया गया है।

नीलकंदन ने कहा कि उन्होंने कंसल्टेशन के दौरान अपनी राय साफ-साफ बता दी थी और मांग की कि तथ्यों को वेरिफाई किया जाए। इस शिकायत ने पार्टी के अंदर सर्कुलेट की गई लिस्ट की क्रेडिबिलिटी पर शक और बढ़ा दिया।

सत्ता की इस खींचतान के केंद्र में केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला हैं। ये सभी मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। दूसरी ओर, विरोधी खेमों ने अपने कार्यकर्ताओं को लामबंद करके और सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर जनमत को अपने पक्ष में करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। अलग-अलग गुटों के बीच विधायकों के समर्थन को लेकर भी होड़ मची हुई है।

वेणुगोपाल के समर्थक नेताओं का दावा है कि उन्हें 48 विधायकों का समर्थन हासिल है, जबकि सतीशन और चेन्निथला के समर्थकों का दावा है कि उन्हें क्रमशः 35 और 23 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इससे पहले, कांग्रेस विधायक दल ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे को मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार दिया गया था।

इस आशंका के बीच कि नेतृत्व को लेकर चल रही यह खींचतान पार्टी के भीतर की फूट को और गहरा कर सकती है, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी का आलाकमान एक ऐसे समझौते के फॉर्मूले पर भी विचार कर रहा है, जिससे विरोधी खेमों को भी संतुष्ट किया जा सके। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं में उपमुख्यमंत्री का पद सृजित करने और कुछ अहम मंत्रालयों का बंटवारा करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि अभी तक किसी भी मुद्दे पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।

अगला अहम घटनाक्रम शनिवार को दिल्ली में राहुल गांधी और केरल के नेताओं के बीच होने वाली चर्चा के बाद सामने आने की उम्मीद है। इस चर्चा में वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केपीसीसी अध्यक्ष सन्नी जोसेफ के शामिल होने की संभावना है, जबकि वेणुगोपाल पहले से ही राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद हैं।

अंतिम फैसले की घोषणा से पहले, राहुल गांधी के इन सभी दावेदारों से अलग-अलग मुलाकात करने की भी संभावना है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ये लंबी चर्चाएं पार्टी के भीतर किसी फूट का नहीं, बल्कि आंतरिक लोकतंत्र का ही प्रतिबिंब हैं।

त्रिकरिपुर से नवनिर्वाचित विधायक संदीप वारियर ने इस पूरी प्रक्रिया को कांग्रेस के भीतर मौजूद लोकतांत्रिक संस्कृति का प्रमाण बताया। उनका तर्क है कि पार्टी कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के विचारों को सक्रियता से जानने का प्रयास करती है।

जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है और लॉबिंग का दौर अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है, कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब एक बेहद नाजुक चुनौती आ खड़ी हुई है, उसे एक तरफ तो अलग-अलग नेताओं की महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन बिठाना है और दूसरी तरफ पार्टी के भीतर एकता भी सुनिश्चित करनी है। रविवार तक यह उम्मीद की जा रही है कि केरल को आखिरकार यह पता चल जाएगा कि राज्य की नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा।

–आईएएनएस

पीएसके

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