तमिलनाडु में एमडीएमके ने डीएमके से तोड़ा 9 साल पुराना गठबंधन

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चेन्नई, 27 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु की क्षेत्रीय पार्टी मारुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एमडीएमके) ने शनिवार को डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होने के अपने फैसले की औपचारिक घोषणा की, जिससे लगभग नौ साल पुरानी राजनीतिक साझेदारी खत्म हो गई। यह फैसला चेन्नई के एग्मोर स्थित पार्टी के मुख्यालय में हुई जनरल काउंसिल और हाई-लेवल कमेटी की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के ऑडिटर अर्जुनाराज ने की और इसमें एमडीएमके के महासचिव वाइको और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पार्टी सूत्रों ने बताया कि पार्टी के भविष्य के राजनीतिक रास्ते और सहयोगी दल के साथ मतभेदों…

चेन्नई, 27 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु की क्षेत्रीय पार्टी मारुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एमडीएमके) ने शनिवार को डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होने के अपने फैसले की औपचारिक घोषणा की, जिससे लगभग नौ साल पुरानी राजनीतिक साझेदारी खत्म हो गई।

यह फैसला चेन्नई के एग्मोर स्थित पार्टी के मुख्यालय में हुई जनरल काउंसिल और हाई-लेवल कमेटी की बैठक में लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता पार्टी के ऑडिटर अर्जुनाराज ने की और इसमें एमडीएमके के महासचिव वाइको और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि पार्टी के भविष्य के राजनीतिक रास्ते और सहयोगी दल के साथ मतभेदों पर विचार-विमर्श करने के बाद नेतृत्व ने डीएमके गठबंधन से अलग होने का प्रस्ताव पारित किया।

यह घटनाक्रम उन खबरों के बीच सामने आया है कि सिरकाझी के विधायक एम. सेंथिल सेल्वन जल्द ही डीएमके में शामिल हो सकते हैं। वह 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के ‘राइजिंग सन’ (उगते सूरज) चुनाव चिह्न पर जीतने वाले दो विधायकों में से एक हैं।

खास बात यह है कि सेंथिल सेलवन शनिवार को हुई जनरल काउंसिल की बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

एमडीएमके ने गठबंधन के तहत डीएमके के चुनाव चिह्न पर सिरकाझी और कडायानल्लूर विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों सीटें जीतीं, हालांकि खबरों के मुताबिक चुनाव के बाद पार्टी की राजनीतिक दिशा और सत्ताधारी टीवीके सरकार को लेकर उसके बदलते रुख पर मतभेद सामने आए।

पार्टी के सूत्रों ने बताया कि सेंथिल सेल्वन कई मुद्दों पर नेतृत्व के रुख के खिलाफ थे।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, सेंथिल सेलवन ने एमएलए पद से इस्तीफ़ा न देने का फैसला किया है। अगर वह औपचारिक रूप से डीएमके में शामिल होते हैं, तो उनके सिरकाजी से विधायक बने रहने की उम्मीद है, क्योंकि वह डीएमके के चुनाव चिह्न पर चुने गए थे।

जनरल काउंसिल ने एक कड़े शब्दों वाला प्रस्ताव भी पारित किया, जिसमें डीएमके पर अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी एआईएडीएमके के साथ संबंध बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया।

प्रस्ताव में कहा गया कि यह “सबको पता” था कि डीएमके ने एआईए़डीएमके के साथ समझौता करने की संभावना तलाशी थी। एक ऐसा कदम जिसे एमडीएमके ने राजनीतिक रूप से अस्वीकार्य बताया।

बैठक में एक और उल्लेखनीय अनुपस्थिति दुरई वाइको की थी, जिनके दूर रहने के फैसले ने पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों को लेकर और अटकलों को जन्म दिया है।

एमडीएमके के औपचारिक रूप से गठबंधन से बाहर होने के साथ भविष्य की चुनावी लड़ाइयों से पहले तमिलनाडु के विपक्षी राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव की संभावना है।

–आईएएनएस

एसएचके/वीसी

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