पश्चिम बंगाल में स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए बनाए गए अलग-अलग मंत्री, जानें इसके चार कारण

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कोलकाता, 11 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी सरकार के हालिया विभागीय बंटवारे में स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के लिए दो अलग-अलग मंत्रियों की नियुक्ति का निर्णय कई उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लिया गया है। भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई से जुड़े सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पत्रकार से नेता बने जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को राज्य का उच्च शिक्षा मंत्री बनाया गया है, जबकि वरिष्ठ भाजपा विधायक दीपक बर्मन को स्कूल शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह व्यवस्था ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार से अलग है,…

कोलकाता, 11 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी सरकार के हालिया विभागीय बंटवारे में स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के लिए दो अलग-अलग मंत्रियों की नियुक्ति का निर्णय कई उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लिया गया है। भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई से जुड़े सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

पत्रकार से नेता बने जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को राज्य का उच्च शिक्षा मंत्री बनाया गया है, जबकि वरिष्ठ भाजपा विधायक दीपक बर्मन को स्कूल शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह व्यवस्था ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार से अलग है, जिसमें पूरे शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी एक ही मंत्री के पास होती थी।

तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी समय-समय पर ब्रात्य बसु, पार्थ चटर्जी और फिर से ब्रात्य बसु के पास रही।

स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए अलग-अलग मंत्रियों की व्यवस्था पहले वाम मोर्चा सरकार के दौरान भी लागू थी। 2011 में वाम मोर्चा के कार्यकाल के अंत में स्कूल शिक्षा मंत्री पार्थ डे और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. सुदर्शन रॉय चौधरी थे।

भाजपा राज्य समिति के एक सूत्र के अनुसार, इस बार दो अलग-अलग मंत्रियों की व्यवस्था चार मुख्य लक्ष्यों को ध्यान में रखकर की गई है।

पहला लक्ष्य है विशेष ध्यान देना। स्कूल शिक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों की बुनियादी नींव मजबूत करना है, जबकि उच्च शिक्षा का उद्देश्य शोध और रोजगार-उन्मुख कौशल विकसित करना है। इसलिए दोनों स्तरों के लिए अलग मंत्री अपने-अपने क्षेत्र पर बेहतर ध्यान दे सकेंगे।

दूसरा लक्ष्य है बेहतर योजना और बजट आवंटन। प्रत्येक स्तर की शिक्षा के लिए अलग-अलग बजट और योजनाओं की आवश्यकता होती है। अलग मंत्री होने से बजट का सही उपयोग और ढांचागत विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा।

तीसरा उद्देश्य लक्ष्य-आधारित नीति बनाना है, ताकि स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों के लिए अलग-अलग जरूरतों के अनुसार नीतियां बनाई जा सकें।

चौथा और अंतिम उद्देश्य तेज प्रशासनिक निर्णय लेना है, क्योंकि दोनों विभागों की जिम्मेदारियों को एक साथ संभालना अक्सर मुश्किल होता है। अलग-अलग मंत्री होने से फाइलों और मंजूरी की प्रक्रिया सरल होगी और निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे।

–आईएएनएस

एएमटी/वीसी

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