नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि पीएम-कुसुम स्कीम से देशभर में 30 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ है और इस योजना के माध्यम से हर किसान सोलर पंप से एक लाख रुपए की सालाना बचत कर पा रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी में भारत मंडपम में ‘भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन’को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेज प्रगति की है और उद्योगों, खेतों तथा घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “देश भर के किसान पीएम-कुसुम योजना का लाभ उठा रहे हैं। इस पहल के जरिए, 30 लाख से ज्यादा किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाली सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अनुमान है कि सोलर पंपों का इस्तेमाल करके हर किसान सालाना लगभग 1 लाख रुपए की बचत कर पा रहा है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश के स्वच्छ ऊर्जा बुनियादी ढांचे को और बढ़ाने के लिए सभी सरकारी इमारतों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और स्ट्रीट-लाइटिंग सिस्टम को सौर ऊर्जा से जोड़ना है।
उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों में, हमने उद्योगों और खेतों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का काम किया है। पूरे भारत में 44,000 से अधिक सरकारी इमारतें अब सौर ऊर्जा से जुड़ी हैं, जिससे सालाना लगभग 700 करोड़ रुपए की बचत हो रही है।”
प्रधानमंत्री ने ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत हुई प्रगति का भी जिक्र किया। फरवरी 2024 में शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना है।
उन्होंने कहा, “पिछले 24-25 महीनों में 65 लाख से अधिक परिवार इस पहल से जुड़े हैं।”
वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश ने 2025 में ही अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि पेरिस समझौते के तहत तय समय-सीमा से पांच साल पहले ही हासिल कर ली गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “पेरिस समझौते के तहत, भारत ने अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से पूरा करने का संकल्प लिया था। हमने 2025 में ही, तय समय से पांच साल पहले, इस लक्ष्य को हासिल कर लिया। आज, भारत की स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आता है।”
–आईएएनएस
एबीएस
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