तिरुवनंतपुरम, 19 अगस्त (आईएएनएस)। केरल में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने बुधवार को केंद्र पर आरोप लगाया कि वह आने वाली जनगणना का इस्तेमाल नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि माता-पिता के जन्मस्थान और धर्म जैसी जानकारी मांगने वाले सवाल नागरिकता से जुड़ी ऐसी प्रक्रिया का रास्ता खोल सकते हैं जो लोगों को बांटने वाली हो।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में विजयन ने कहा कि ऐसी खबरें बहुत चिंताजनक हैं कि जनगणना के सवालों में ये बातें शामिल होंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र जनगणना के साथ-साथ एनपीआर का एजेंडा भी चुपके से लागू करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हालांकि जनगणना और एनपीआर अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, फिर भी केंद्र इन दोनों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की 2018-19 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए विजयन ने दावा किया कि एनपीआर के जरिए इकट्ठा की गई जानकारी का इस्तेमाल नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) तैयार करने में किया जा सकता है और उन्होंने एनपीआर को एनआरसी की दिशा में पहला कदम बताया।
उन्होंने कहा कि जनगणना में माता-पिता के जन्मस्थान और धर्म के बारे में सवाल शामिल करने का मकसद बिल्कुल साफ है। उन्होंने तर्क दिया कि नागरिकता को धर्म से जोड़ने वाली किसी भी नीति को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विजयन ने मांग की कि केंद्र जनगणना के सवालों की सूची से उन सवालों को तुरंत हटाए जिन्हें उन्होंने लोगों को बांटने के मकसद से पूछे जाने वाले संदिग्ध सवाल बताया।
उन्होंने समाज के धर्मनिरपेक्ष वर्गों से भी अपील की कि वे एकजुट होकर इस खतरनाक कदम का विरोध करें, जिसका मकसद आबादी के एक खास हिस्से को निशाना बनाना है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने केरल की यूडीएफ सरकार की भी आलोचना की और जनगणना को लेकर चिंताओं के बावजूद इस मुद्दे पर उसकी चुप्पी पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि एनपीआर के मुद्दे पर कांग्रेस का हाथ भी साफ नहीं है।
–आईएएनएस
एमएस/
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