पटना, 19 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के गोपालगंज जिले के जादोपुर पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने, जबरन वसूली और रिश्वतखोरी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसके बाद जिला पुलिस ने सख्त कार्रवाई की।
शुरुआती जांच के मुताबिक, कई लोगों को कथित तौर पर बिना किसी एफआईआर, आधिकारिक रिकॉर्ड या कानूनी अधिकार के घंटों तक, और एक मामले में तो करीब 36 घंटों तक, पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया।
कथित तौर पर उनके परिवारों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई और उनसे रिहाई या मामलों से नाम हटवाने के बदले पैसे की मांग की गई।
गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनय कुमार को 16 अगस्त को कथित रैकेट के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने डीएसपी (मुख्यालय) को आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया। इसके बाद हुई जांच में कथित तौर पर जबरन वसूली के कई मामले सामने आए।
जांचकर्ताओं को एक व्यक्ति से बिचौलिए के जरिए कथित तौर पर 50 हजार रुपए मांगने के आरोप मिले। इसी तरह, एक और मामले में एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी को छोड़ने के लिए आरोपी अधिकारियों ने 75 हजार रुपए लिए थे।
इसी तरह, आरोपी एसएचओ और उनके मातहत कर्मचारियों ने एक युवक का नाम केस से हटाने के लिए 55 हजार रुपए की मांग की है। जांच टीम को उस समय के एसएचओ और कथित बिचौलिए के बीच बार-बार हुई टेलीफोन पर बातचीत के सबूत मिले हैं।
डीएसपी की जांच के आधार पर 18 अगस्त को जादोपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
इसके बाद, पुलिस ने जादोपुर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन एसएचओ अनिल राम, कथित बिचौलिये राजू यादव और गांव के चौकीदार राकेश कुमार व महंथ कुमार यादव को गिरफ्तार किया। मामले में एसएचओ और दो चौकीदारों को भी तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इस घटना के बाद गोपालगंज पुलिस प्रशासन ने भ्रष्टाचार, अधिकार के दुरुपयोग और गैर-कानूनी हिरासत के खिलाफ ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति को फिर से दोहराया है।
एसपी विनय कुमार ने यह भी चेतावनी दी कि जिले में किसी भी मामले की जांच में दखल देने या गवाहों को डराने-धमकाने की कोशिश करने वाले पुलिसकर्मियों या बिचौलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
–आईएएनएस
पीएसके
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