रांची, 19 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 26 दिनों से चल रहा आंदोलन सरकार के आश्वासन के बाद बुधवार को जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने दो महीने के लिए स्थगित कर दिया। मंच ने कहा कि छात्रों ने सरकार पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए आंदोलन स्थगित किया है। उम्मीद है कि इस बार भरोसा नहीं टूटेगी। अब सरकार को छात्रों के हित में ठोस और पारदर्शी कार्रवाई करनी होगी। छात्रों ने चेतावनी दी कि जांच प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही या पक्षपात हुआ तो आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा।
आंदोलन स्थगित करने की घोषणा के बाद मंच की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। छात्रों ने कहा कि सरकार ने कैबिनेट में परीक्षाओं में अनियमितता को स्वीकार करते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। उनका कहना था कि अगर सरकार ने समय रहते छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई की होती और जांच कराई होती तो शायद उन्हें 25 दिनों तक आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ती।
छात्रों ने कहा कि सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं से जुड़े मामलों में अदालत का रुख करने की बात कही है। ऐसे में सरकार को अदालत में भी छात्रों के पक्ष और परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं को मजबूती से रखना चाहिए। यदि सरकार ने अदालत में प्रभावी तरीके से अपना पक्ष नहीं रखा तो इसे छात्रों के साथ धोखा माना जाएगा। मंच से जुड़े छात्रों ने कहा कि जांच न्यायिक निगरानी में और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। उनका कहना था कि जांच का उद्देश्य केवल परीक्षा रद्द करना नहीं, बल्कि अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना होना चाहिए।
आंदोलनकारी छात्रों ने आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की भी मांग की। उनका कहना था कि उन्होंने अपने अधिकार और न्याय के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया है। इसलिए आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए। छात्रों ने पीजीटी परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि लगातार तीन वर्षों तक पीजीटी का परिणाम जारी किया गया और इस प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप सामने आते रहे।
मंच ने पीजीटी परीक्षा को भी रद्द कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि कथित अनियमितताओं से जुड़े कई तथ्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और उनकी जांच की जानी चाहिए। नगरपालिका भर्ती परीक्षा में करीब 90 प्रतिशत कटऑफ आने को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए। उन्होंने इस परीक्षा में भी कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। छात्रों ने कहा कि यदि जांच के कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होती है तो उन अभ्यर्थियों को भी अवसर दिया जाना चाहिए जिनकी उम्र इस दौरान निर्धारित सीमा से बाहर हो गई है।
–आईएएनएस
एसएनसी/डीकेपी
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