‘हर फैसले के केंद्र में छात्र होने चाहिए’, शिक्षा क्षेत्र पर बोले मेघालय सीएम संगमा

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शिलांग, 4 नवंबर (आईएएनएस)। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने मंगलवार को कहा कि शिक्षा क्षेत्र में हर फैसले के केंद्र में छात्र होने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल बुनियादी ढांचे में सुधार करने और सरकारी खर्च बढ़ाने से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाएगी। प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल की 126वीं वर्षगांठ के मौके पर बोलते हुए, संगमा ने संस्थान के नए हायर सेकेंडरी सेक्शन का उद्घाटन किया और स्कूल ऑडिटोरियम की आधारशिला रखी। शिक्षा को सामाजिक बदलाव लाने का सबसे शक्तिशाली साधन बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों और स्कूलों में निवेश…

शिलांग, 4 नवंबर (आईएएनएस)। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने मंगलवार को कहा कि शिक्षा क्षेत्र में हर फैसले के केंद्र में छात्र होने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल बुनियादी ढांचे में सुधार करने और सरकारी खर्च बढ़ाने से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाएगी।

प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल की 126वीं वर्षगांठ के मौके पर बोलते हुए, संगमा ने संस्थान के नए हायर सेकेंडरी सेक्शन का उद्घाटन किया और स्कूल ऑडिटोरियम की आधारशिला रखी।

शिक्षा को सामाजिक बदलाव लाने का सबसे शक्तिशाली साधन बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों और स्कूलों में निवेश करना किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ा निवेश है।

संगमा ने याद दिलाया कि एक समय मेघालय में लगभग 50 प्रतिशत छात्र एसएसएलसी परीक्षाओं में फेल हो जाते थे। उन्होंने कहा कि इस स्थिति ने हजारों युवा छात्रों के सपनों को उनके पूरा होने से पहले ही कुचल दिया था।

उन्होंने बताया कि सरकार के ‘सीएम इंपैक्ट’ कार्यक्रम ने पास प्रतिशत को 90 प्रतिशत से ऊपर ले जाने में मदद की है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने राज्य में उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी का जिक्र करते हुए बताया कि मेघालय में लगभग 9,000 लोअर प्राइमरी स्कूल हैं, लेकिन हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या केवल 500 के आसपास है और कॉलेजों की संख्या 100 से थोड़ी ही अधिक है।

उन्होंने कहा, “यह एक बड़ी चुनौती पैदा करता है और इसके कारण छात्र पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं (ड्रॉपआउट)। हमें और अधिक हायर सेकेंडरी स्कूलों और कॉलेजों की जरूरत है, लेकिन ऐसे बदलावों में समय लगता है।”

संगमा ने बताया कि सरकार शिक्षा पर सालाना लगभग 4,000 करोड़ रुपए खर्च करती है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि केवल खर्च की गई राशि ही सफलता का पैमाना नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “अंततः, हमें शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए। यह तभी संभव होगा जब हम अपने सभी निर्णयों के केंद्र में छात्रों को रखें।”

उन्होंने शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समितियों से आग्रह किया कि वे हर बच्चे पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दें, क्योंकि हर छात्र की क्षमताएं, सीखने की शक्ति और जरूरतें अलग-अलग होती हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार एक ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है, जिससे 700 से अधिक ऐसे सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों को वित्तीय सहायता दी जा सके, जिन्हें अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार एक ऐसी निष्पक्ष और टिकाऊ योजना पर काम कर रही है, जिससे शिक्षा क्षेत्र के दीर्घकालिक हितों को सुरक्षित रखते हुए सहायता का विस्तार किया जा सके।

–आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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IANS Agency

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