राज ठाकरे ने महाराष्ट्र दिवस समारोह को लेकर सरकार पर साधा निशाना, उदासीनता का लगाया आरोप

मुंबई, 1 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस समारोह को लेकर राज्य सरकार पर ‘आधा-अधूरा’ रवैया अपनाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री द्वारा हुतात्मा चौक पर श्रद्धांजलि देने के बाद राज ठाकरे भी वहां पहुंचे और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के शहीदों को नमन किया।

हुतात्मा चौक से लौटने के बाद राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि महाराष्ट्र दिवस को राज्य सरकार सिर्फ औपचारिकता की तरह मना रही है। कई वर्षों से उन्हें यह बात खटक रही है कि सरकार महाराष्ट्र दिवस को राज्य के गौरव के उत्सव की बजाय एक सरकारी रस्म की तरह निभा रही है।

राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई स्थित हुतात्मा स्मारक को ठीक से सजाया तक नहीं गया था और पूरे आयोजन में सरकारी उदासीनता साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार केंद्र के नेताओं को नाराज होने से बचाने के लिए महाराष्ट्र दिवस को बड़े स्तर पर मनाने से बच रही है। राज ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि क्या सरकार को डर है कि अगर महाराष्ट्र दिवस धूमधाम से मनाया गया तो दिल्ली के बड़े नेता नाराज हो जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि अगर यह किसी अन्य समुदाय या खास आयोजन का कार्यक्रम होता, तो सड़कों पर कालीन बिछाए जाते और शहर को रोशनी से सजाया जाता, लेकिन महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता से जुड़े इस दिन को उदासी के साथ मनाया जा रहा है।

राज ठाकरे ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मराठी लोगों को हुतात्मा स्मारक के महत्व से दूर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सरकार के साथ-साथ आम लोगों की उदासीनता पर भी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि हुतात्मा स्मारक राज्य के हर नागरिक के लिए तीर्थ स्थल की तरह होना चाहिए।

राज ठाकरे ने कहा कि मराठी लोगों ने मुंबई को बनाया और उसके लिए संघर्ष किया, लेकिन अब वही लोग अपने इतिहास से दूर होते जा रहे हैं।

उन्होंने मराठी समाज से अपील करते हुए कहा, ”हाथ जोड़कर निवेदन है कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के संघर्ष को मत भूलिए। मुंबई में जो ऊंची-ऊंची इमारतें दिखती हैं, वे इसलिए हैं क्योंकि यह शहर महाराष्ट्र का हिस्सा बना रहा। इस पर गर्व कीजिए।”

राज ठाकरे ने अपने संदेश के अंत में मुंबई और पूरे महाराष्ट्र के मराठी लोगों से अपील की कि अगले साल 1 मई को बड़ी संख्या में हुतात्मा स्मारक पर जुटें, ताकि सरकार को मजबूर होकर इस दिन को उसका उचित सम्मान देना पड़े।

–आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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