राजस्थान में एससी-एसटी पर अत्याचार के मामले घटे

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जयपुर, 22 जुलाई (आईएएनएस)। राजस्थान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के खिलाफ अपराधों में कमी आई है। राज्य सरकार ने इसका श्रेय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के सख्ती से पालन और मामलों की जांच की कड़ी निगरानी को दिया है। अधिकारियों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच एससी-एसटी समुदायों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को जयपुर में राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी)…

जयपुर, 22 जुलाई (आईएएनएस)। राजस्थान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के खिलाफ अपराधों में कमी आई है। राज्य सरकार ने इसका श्रेय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के सख्ती से पालन और मामलों की जांच की कड़ी निगरानी को दिया है। अधिकारियों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच एससी-एसटी समुदायों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मंगलवार को जयपुर में राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों की सुरक्षा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और राज्य में सामाजिक सद्भाव बढ़ाने वाली पहलों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

बैठक में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अत्याचार के मामलों में लगातार कमी आई है। 2024 की तुलना में 2025 में ऐसे मामलों में 15.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 2025 की पहली छमाही के मुकाबले 2026 की पहली छमाही में मामलों में 15.49 प्रतिशत की और कमी आई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मामलों में आई यह कमी सरकार की लगातार निगरानी, मजबूत पुलिस व्यवस्था, कानून के बेहतर पालन और तेज जांच के साथ जल्द न्याय दिलाने के प्रयासों का नतीजा है।

समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के निपटारे में तेजी आई है। अब लगभग 68 प्रतिशत मामलों का निपटारा तय 60 दिनों के भीतर किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, 60 दिनों के भीतर निपटाए गए मामलों का प्रतिशत 2023 में 35.16 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर करीब 47 प्रतिशत और जुलाई 2026 तक 67.88 प्रतिशत हो गया। वहीं, मामलों की जांच और निपटारे में लगने वाला औसत समय भी 128 दिनों से घटकर 53 दिन रह गया है।

मुख्यमंत्री ने पुलिस और अभियोजन विभाग को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय के साथ काम करें, ताकि दोषसिद्धि दर बढ़े और संवेदनशील मामलों में जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी समुदायों से जुड़े मामलों में संस्थागत व्यवस्था मजबूत करने के लिए राज्य के 45 पुलिस जिलों में एससी-एसटी प्रकोष्ठ बनाए जा चुके हैं। बाकी छह जिलों में भी जल्द ऐसे प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जिला और उपमंडल स्तर पर नियमित रूप से सतर्कता समिति की बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने साल में दो बार पंचायत स्तर पर निगरानी बैठकें करने, सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने, स्थानीय समस्याओं का समय पर समाधान करने और लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाने को भी कहा।

मुख्यमंत्री ने लंबे समय से लंबित मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने एक साल से अधिक समय से लंबित मामलों की जांच में तेजी लाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संवेदनशील मामलों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जाए। उन्होंने सभी दर्ज मामलों की लगातार निगरानी रखने और जांच व अभियोजन की प्रक्रिया में होने वाली किसी भी देरी को कम करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एफआईआर दर्ज होने से लेकर अदालत के अंतिम फैसले तक, हर पात्र चरण में पीड़ितों को समय पर वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए।

बैठक में पिछले तीन वर्षों में दी गई वित्तीय सहायता, ऑनलाइन सहायता पोर्टल की प्रगति, लंबित मुआवजा मामलों, आरोपपत्रों और जांच की स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और पुलिस थानों को निर्देश दिया कि लंबित मुआवजा मामलों की नियमित निगरानी करें, ताकि पात्र लाभार्थियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।

समिति ने हेल्पलाइन, हेल्प डेस्क और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य और राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर मिलने वाली शिकायतों की लगातार निगरानी की जाए और उनका जल्द समाधान किया जाए।

अधिकारियों ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगाकर बंद किए गए मामलों के यादृच्छिक सत्यापन की सीमा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दी गई है। इससे निगरानी और जवाबदेही मजबूत हुई है।

बैठक के अंत में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए पुलिस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और अभियोजन विभाग को आपसी समन्वय और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।

बैठक में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेधम, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, समिति के सदस्य, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

–आईएएनएस

एसएचके

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