सोनीपत मानव विकास रिपोर्ट 2026 दिल्ली में प्रस्तुत, स्थानीय विकास चुनौतियों पर मंथन

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नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। सोनीपत मानव विकास रिपोर्ट (एचडीआर) 2026, जिसे हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा जनवरी 2026 में जारी किया गया था, को हाल ही में नई दिल्ली में औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ हरियाणा स्टडीज (जेआईएचएस) द्वारा किया गया, जिसमें नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और विकास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने रिपोर्ट के निष्कर्षों और नीतिगत प्रभावों पर चर्चा की। रिपोर्ट को हरियाणा सरकार के पूर्व मुख्य सचिव विजय वर्धन और केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त विकास गुप्ता ने जारी किया। इस अवसर पर विश्व बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. दलाल…

नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। सोनीपत मानव विकास रिपोर्ट (एचडीआर) 2026, जिसे हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा जनवरी 2026 में जारी किया गया था, को हाल ही में नई दिल्ली में औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया।

इस कार्यक्रम का आयोजन जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ हरियाणा स्टडीज (जेआईएचएस) द्वारा किया गया, जिसमें नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और विकास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने रिपोर्ट के निष्कर्षों और नीतिगत प्रभावों पर चर्चा की।

रिपोर्ट को हरियाणा सरकार के पूर्व मुख्य सचिव विजय वर्धन और केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त विकास गुप्ता ने जारी किया। इस अवसर पर विश्व बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. दलाल मूसा, यूएन वूमेन की डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह, शहरी विशेषज्ञ और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) के पूर्व निदेशक जगन शाह, इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) अलख एन. शर्मा और यूएनडीपी इंडिया की हेड ऑफ कम्युनिकेशंस एंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स अमराह अशरफ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार, जेआईएचएस की निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मृणालिनी झा और जिंदल स्कूल ऑफ गवर्नमेंट एंड पब्लिक पॉलिसी के डीन प्रोफेसर आर. सुदर्शन भी शामिल हुए।

अपने उद्घाटन वक्तव्य में प्रोफेसर (डॉ.) मृणालिनी झा ने सोनीपत एचडीआर 2026 के प्रमुख निष्कर्षों पर प्रकाश डाला और क्षेत्रीय शोध को आगे बढ़ाने के लिए जेआईएचएस की वर्तमान और भविष्य की पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की। वहीं, कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार ने जेआईएचएस जैसे संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये संस्थान नीतिगत रूप से प्रासंगिक और सुदृढ़ क्षेत्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण हैं।

विजय वर्धन और विकास गुप्ता ने अपने प्रशासनिक अनुभव के आधार पर शोध टीम की सराहना की और मानव विकास रिपोर्टों की उपयोगिता को रेखांकित किया, जो सार्वजनिक नीति और प्रशासन में अहम भूमिका निभाती हैं।

कार्यक्रम में विभिन्न अध्यायों के लेखकों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, श्रम और आजीविका, शासन, स्थानिक परिवर्तन और बुनियादी सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों के निष्कर्षों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया। इन प्रस्तुतियों में सोनीपत जिले की विकास संबंधी चुनौतियों और नीतिगत सुझावों को सामने रखा गया।

‘फ्रॉम एविडेंस टू एक्शन: लेवरेजिंग डिस्ट्रिक्ट ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट्स फॉर इन्क्लूसिव डेवलपमेंट’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने एचडीआर की प्रासंगिकता और भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श किया।

डॉ. दलाल मूसा ने सामाजिक सुरक्षा को मानव विकास रिपोर्ट का अहम हिस्सा बताते हुए इसे सामाजिक अनुबंध की आधारशिला और संवेदनशील परिस्थितियों में लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। उन्होंने प्रवासी आबादी से जुड़े आंकड़ों को शामिल करने और रिपोर्ट को अधिक सुलभ बनाने के लिए इन्फोग्राफिक्स आधारित प्रस्तुति पर जोर दिया।

कांता सिंह ने अपने सोनीपत के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके किशोरावस्था के समय की तुलना में वर्तमान में लड़कियों की शिक्षा और खेलों, विशेष रूप से वॉलीबॉल में भागीदारी में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर सांस्कृतिक कारकों का गहरा प्रभाव पड़ता है और इसके लिए बेरोजगारी दर से आगे बढ़कर अधिक सूक्ष्म संकेतकों की जरूरत है। साथ ही, उन्होंने लिंग आधारित आंकड़ों के बेहतर वर्गीकरण और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं पर ध्यान देने की बात कही।

प्रोफेसर (डॉ.) अलख एन. शर्मा ने कमजोर रोजगार की पहचान पर जोर दिया और जिला स्तर की वास्तविकताओं को समझने के लिए प्राथमिक आंकड़ों के उपयोग को बढ़ाने की वकालत की।

जगन शाह ने जिला स्तर पर स्थानिक योजना अवसंरचना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्थानिक परिवर्तन शहरी अर्थव्यवस्था की ओर संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है। उन्होंने स्थानीय सरकारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए स्थानिक संपत्तियों के वित्तीयकरण के पहलुओं पर भी गहन अध्ययन की जरूरत बताई।

अमराह अशरफ ने वैश्विक स्तर पर मानव विकास रिपोर्टों की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि अब तक 800 से अधिक ऐसी रिपोर्टें प्रकाशित हो चुकी हैं और भारत उप-राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक एचडीआर तैयार करने वाला देश है।

पैनल चर्चा का संचालन प्रोफेसर (डॉ.) नवीन थॉमस ने किया। चर्चा के दौरान प्रतिभागियों के बीच गहन विचार-विमर्श हुआ, जिसमें जिला स्तर पर साक्ष्यों को मजबूत करने, डेटा सिस्टम में सुधार और संस्थागत भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि मानव विकास रिपोर्टों को व्यवहारिक और समावेशी नीतिगत परिणामों में बदला जा सके।

–आईएएनएस

डीएससी

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