तमिलनाडु विधानसभा ने ‘मेकेदातु बांध’ के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया

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चेन्नई, 19 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से इस योजना को किसी भी प्रकार की मंजूरी न देने का आग्रह किया गया। सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है और राज्य के किसानों और जनता के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। विजय ने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जल हमारा…

चेन्नई, 19 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से इस योजना को किसी भी प्रकार की मंजूरी न देने का आग्रह किया गया।

सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है और राज्य के किसानों और जनता के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

विजय ने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जल हमारा मूलभूत अधिकार और संसाधन है। इसकी रक्षा की जिम्मेदारी हम सभी की है। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब बात हमारी जनता और किसानों के कल्याण की आती है, तो हमें एकजुट रहना चाहिए।

प्रस्ताव में कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित संतुलन जलाशय परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर आपत्ति जताई गई है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 9,000 करोड़ रुपए है। प्रस्ताव को एकतरफा और कावेरी जल बंटवारे से संबंधित मौजूदा कानूनी और न्यायिक प्रावधानों के विपरीत बताया गया है।

तमिलनाडु ने तर्क दिया कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कावेरी बेसिन एक कमी वाला बेसिन है, जिसमें उपलब्ध जल पहले से ही तटवर्ती राज्यों के बीच आवंटित किया जा चुका है। परिणामस्वरूप, प्रस्ताव में कहा गया कि बेसिन में कोई भी नई परियोजना शुरू नहीं की जा सकती जिससे आवंटित हिस्से से अधिक जल का उपयोग या भंडारण संभव हो सके।

विधानसभा ने केंद्र से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किए बिना कर्नाटक द्वारा परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर भी चिंता व्यक्त की। इसने ऐसे प्रयासों को अस्वीकार्य बताया और केंद्र सरकार से कर्नाटक को बांध परियोजना को आगे न बढ़ाने की सलाह देने का आग्रह किया।

इसके अलावा, सदन ने केंद्रीय जल आयोग से कर्नाटक की परियोजना संबंधी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को संसाधित या अनुमोदित न करने का आग्रह किया। प्रस्ताव ने तमिलनाडु सरकार द्वारा योजना के कार्यान्वयन को रोकने के लिए उठाए जा रहे सभी कदमों का समर्थन किया और कहा कि कावेरी जल पर निर्भर किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए ऐसे उपाय आवश्यक हैं।

इस मुद्दे ने कांग्रेस पार्टी के भीतर भी फूट डाल दी है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार इस परियोजना का समर्थन कर रही है, जबकि तमिलनाडु के कांग्रेस नेता टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के विरोध का समर्थन कर रहे हैं।

कर्नाटक लगातार यह कहता रहा है कि मेकेदातु परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु की बढ़ती पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करना और 400 मेगावाट जलविद्युत ऊर्जा उत्पन्न करना है। वहीं, तमिलनाडु को आशंका है कि कावेरी नदी पर किसी भी नए जलाशय का निर्माण होने से निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और उसने इस परियोजना के प्रति अपना कड़ा विरोध दोहराया है।

इससे पहले, विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक की विकास योजना रिपोर्ट (डीपीआर) को खारिज करने की मांग की थी और इस बात पर जोर दिया था कि निचले राज्यों की सहमति के बिना कावेरी नदी पर किसी भी नए जलाशय का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए।

–आईएएनएस

एमएस/

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