चेन्नई, 19 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली नई तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) सरकार ने राज्य की लंबे समय से चली आ रही दो-भाषा नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है। शिक्षा मंत्री राजमोहन ने घोषणा की है कि मौजूदा सरकार के तहत इस फॉर्मूले में कोई बदलाव नहीं होगा।
स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों के साथ अपनी पहली रिव्यू मीटिंग के बाद मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए, राजमोहन ने कहा कि तमिल और अंग्रेजी का दो-भाषा सिस्टम पूरे राज्य के स्कूलों में जारी रहेगा और इसे तमिलनाडु और टीवीके सरकार दोनों के लिए जरूरी बताया।
राजमोहन ने जोर देकर कहा, “अंग्रेजी पर्याप्त है और टीवीके किसी भी तरह के अतिरिक्त दबाव नहीं झेलेंगे। पार्टी के आदर्शों से कोई समझौता नहीं होगा।”
मंत्री ने कहा कि तमिल, मातृ भाषा के तौर पर, राज्य के अंदर बातचीत के लिए प्राथमिक भाषा बनी रहेगी, जबकि अंग्रेजी दुनिया भर से जुड़ने का माध्यम बनी रहेगी।
उन्होंने कहा, “दो-भाषा नीति टीवीके का घोषित आदर्श है।” राजमोहन की यह बात केंद्र सरकार की ओर से पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) इनिशिएटिव जैसी स्कीम्स के जरिए तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने के नई घोषणा के बीच आई है।
यह पूछे जाने पर कि क्या तमिलनाडु ‘पीएम श्री’ स्कीम में अभी के रूप में शामिल होगा। मंत्री ने कहा कि राज्य पहले यह देखेगा कि प्रोग्राम से जुड़ी शर्तें तमिलनाडु के शैक्षणिक लक्ष्यों और प्राथमिकताओं से मेल खाती हैं या नहीं।
उन्होंने आगे कहा कि मूल्यांकन के बाद ही सरकार केंद्र प्रायोजित कार्यक्रमों में शामिल होने पर अंतिम निर्णय लेगी।
राजमोहन ने कहा, “हमें पिछले दो सालों से सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) का फंड नहीं मिला है, जो छात्रों और शिक्षा विभाग के लिए बहुत बड़ी दुखद बात है।” उन्होंने आगे कहा कि यह फंड स्टूडेंट्स के लिए है, अधिकारियों के लिए नहीं।
मंत्री ने कहा, “साथ ही, हम किसी भी तरह के अतिरिक्त दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।” राजमोहन ने इस बात पर जोर दिया कि नया टीवीके प्रशासन शिक्षा में भाषा को लेकर तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही स्थिति को कमजोर नहीं करेगा।
उनके अनुसार, दो-भाषा का फ्रेमवर्क सिर्फ एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं था, बल्कि यह तमिल की रक्षा करने और स्टूडेंट्स को राज्य के बाहर और विदेश में मौकों के लिए अंग्रेजी सिखाने के राज्य के बड़े समर्पण को दिखाता है। सिंगापुर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके फाउंडिंग प्राइम मिनिस्टर ली कुआन यू ने दुनिया से जुड़ने के लिए मंडरिन या किसी दूसरी भाषा के बजाय इंग्लिश का इस्तेमाल करके गरीबी से जूझ रहे देश को एक प्रमुख वैश्विक देश में बदल दिया।
उन्होंने सरकार की नीति को छात्रों के लिए सांस्कृतिक सरोकार और वास्तविक सशक्तीकरण, दोनों का मामला बताया।
मंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकार और मिट्टी के अधिकार टीवीके सरकार के मुख्य आदर्श वाक्य हैं।
–आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
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