लद्दाख में सैन्य वाहन खाई में गिरा, दो सैनिकों की मौत

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लेह, 4 नवंबर (आईएएनएस)। कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को नामिका ला दर्रे के इलाके में एक सड़क हादसे में दो सैनिकों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में नेशनल हाईवे-1 (कारगिल-लेह नेशनल हाईवे) पर नामिका ला दर्रे के पास, भारतीय सेना का एक भारी सैन्य वाहन सड़क से फिसलकर एक गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे में वाहन में सवार भारतीय सेना के दो जवान चालक और सह-चालक की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, यह दुर्घटना कारगिल-लेह सेक्टर में नामिका ला दर्रे के पास दोपहर 1:30 बजे हुई। वाहन में सवार दोनों सैनिकों की…

लेह, 4 नवंबर (आईएएनएस)। कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को नामिका ला दर्रे के इलाके में एक सड़क हादसे में दो सैनिकों की मौत हो गई।

अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में नेशनल हाईवे-1 (कारगिल-लेह नेशनल हाईवे) पर नामिका ला दर्रे के पास, भारतीय सेना का एक भारी सैन्य वाहन सड़क से फिसलकर एक गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे में वाहन में सवार भारतीय सेना के दो जवान चालक और सह-चालक की मौत हो गई।

अधिकारियों के अनुसार, यह दुर्घटना कारगिल-लेह सेक्टर में नामिका ला दर्रे के पास दोपहर 1:30 बजे हुई। वाहन में सवार दोनों सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय पुलिस और बचाव दलों ने शवों को बाहर निकाला और उन्हें कानूनी औपचारिकताओं और पोस्टमार्टम के लिए चिकतन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भेज दिया।

अधिकारियों ने बताया कि वाखा पुलिस स्टेशन में ‘भारतीय न्याय संहिता’ (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

नामिका ला दर्रा, जिसे ‘आसमान के खंभे’ के रूप में भी जाना जाता है, लद्दाख की जंस्कार पर्वत श्रृंखला में समुद्र तल से 3,700 मीटर (12,139 फीट) की ऊंचाई पर स्थित एक पहाड़ी दर्रा है।

यह श्रीनगर-लेह हाईवे (एनएच-1) पर स्थित है, जो लेह से लगभग 105 किमी और कारगिल से 54 किमी दूर है। यह कारगिल और लेह के बीच मौजूद दो प्रमुख ऊंचे दर्रों में से एक है; दूसरा दर्रा ‘फोटू ला’ है, जो इससे भी अधिक ऊंचाई पर स्थित है। स्थानीय भाषा में नामिका ला दर्रे का अर्थ ‘आसमान का खंभा’ होता है।

भारतीय सेना दुनिया की सबसे कठिन जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों में काम करती है। सेना चीन से सटी ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल’ (एलएसी) और पाकिस्तान से सटी ‘लाइन ऑफ कंट्रोल’ (एलओसी) जैसी महत्वपूर्ण अग्रिम सीमाओं की सुरक्षा करती है।

सैनिक समुद्र तल से 3,000 मीटर से लेकर 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले मैदानी इलाकों, गहरी घाटियों और दुर्गम पहाड़ी दर्रों में तैनात रहते हैं।

दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र माने जाने वाले सियाचिन ग्लेशियर में, सैनिक 5,400 मीटर (18,000 फीट) से अधिक ऊंचाई पर तैनात रहते हैं, जहां तापमान अक्सर -40 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है। पूर्वी लद्दाख और पैंगोंग त्सो में, हाल के वर्षों में सुरक्षा की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सेना ने लद्दाख के पठार पर रणनीतिक पैंगोंग झील के किनारे और गलवान घाटी पर भी अपनी भारी तैनाती बनाए रखी है।

–आईएएनएस

एससीएच/पीएम

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IANS Agency

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