नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक के बाद एक चुनाव में हार के बाद देश को उम्मीद थी कि कांग्रेस अपनी गलतियों को स्वीकार करेगी, जनता से माफी मांगेगी और आत्मचिंतन करेगी, लेकिन कांग्रेस ने तय कर लिया है कि वह अपनी गलतियों से नहीं सुधरेगी।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को अपनी गलतियों की जिम्मेदारी स्वीकार कर जनता से माफी मांगनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय वे कथित तौर पर भ्रम फैला रहे हैं, झूठे दावे कर रहे हैं और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं।
उन्होंने कांग्रेस के 2 से 8 अक्टूबर तक प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी निशाना साधा। शिवराज ने कहा कि कांग्रेस इसे लोकतंत्र बचाने का मार्च बता रही है, लेकिन यह वास्तव में “सेव डेमोक्रेसी” मार्च नहीं, बल्कि “सेव डायनेस्टी” मार्च है। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने तय कर लिया है कि अब वंशवादी राजनीति नहीं चलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं पर आत्मचिंतन करने के बजाय संस्थाओं पर सवाल उठाने और संवैधानिक निकायों का राजनीतिकरण करने लगती है।
शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को हुई इंडी गठबंधन की बैठक को लेकर भी विपक्षी दलों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि बैठक होने से पहले ही गठबंधन बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य, जहां चुनाव होने वाले हैं, वहां से समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव बैठक में नहीं पहुंचे। उन्होंने सवाल किया कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कहां हैं। शिवराज ने दावा किया कि डीएमके की ओर से यहां तक कहा गया है कि जहां कांग्रेस रहेगी, वहां वे बैठना भी पसंद नहीं करेंगे।
उन्होंने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की गैर-मौजूदगी का भी उल्लेख किया। शिवराज ने कहा कि उद्धव ठाकरे वर्चुअली बैठक से जुड़े, जबकि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भी बैठक में शामिल होने को लेकर उन्होंने सवाल उठाया।
विपक्षी गठबंधन की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “इंडी गठबंधन की हालत तो ये हो गई है कि एक दिल के टुकड़े हजार हुए, कुछ यहां गिरे, कुछ वहां गिरे।”
केंद्रीय मंत्री ने मतदाता सूचियों के संशोधन के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने सवाल उठाया कि डुप्लीकेट वोट क्यों रहने दिए जाएं और गैर-नागरिकों के नाम मतदाता सूची से क्यों नहीं हटाए जाएं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों को संशोधित किया जाना चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाने से पहले इंडी गठबंधन को अपने भीतर की स्थिति पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन के भीतर ही राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सहमति नहीं है।
उन्होंने कहा, “सच बात तो ये है कि इंडी गठबंधन राहुल गांधी को नेता मानने के लिए ही तैयार नहीं है।”
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद अपनी पार्टी के नेताओं से कह रहे थे कि उन पर भरोसा किया जाए और विश्वास किया जाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इसका मतलब यह है कि कांग्रेस को ही राहुल गांधी पर भरोसा नहीं है। शिवराज ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता स्थापित नहीं कर पा रहे हैं और अब अपने राजनीतिक अस्तित्व को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “ये अपने आप को फिर से रिलॉन्च करने की कोशिश कर रहे हैं।”
शिवराज सिंह चौहान ने इंडी गठबंधन की बैठक के नतीजे को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बैठक से देश को किसी ठोस विजन की उम्मीद थी, लेकिन वहां से कुछ हासिल नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “इंडी गठबंधन की बैठक का नतीजा क्या निकला? शून्य विजन, 100 प्रतिशत हताशा और हार का एडवांस बहाना।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आने वाले चुनावों से पहले ही विपक्षी गठबंधन ने अपनी संभावित हार के लिए माहौल तैयार करना शुरू कर दिया है और इसके लिए संस्थाओं तथा चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस को चुनावी हार के बाद अपनी रणनीति, संगठन और राजनीतिक फैसलों पर आत्मचिंतन करना चाहिए था। जनता से माफी मांगने और अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों से पार्टी की स्थिति में सुधार नहीं होगा।
–आईएएनएस
डीएससी
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