नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान एक ओर एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया, वहीं कांग्रेस ने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने और सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सत्ता पक्ष के सांसदों के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने संसद परिसर में ऐसा नजारा पहली बार देखा है।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने गृह मंत्री से सदन में आकर संबंधित मुद्दे पर चर्चा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार है और सवालों के जवाब देने को भी तैयार है, लेकिन गृह मंत्री सदन में आने के बजाय पूरी तरह छिप रहे हैं। वेणुगोपाल ने सदन की कार्यवाही में रुकावट के लिए सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार के अलग-अलग एजेंडे हैं, लेकिन देश की जनता ने उन एजेंडों को खारिज कर दिया है।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी संसद के गतिरोध को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार को जब यह महसूस हुआ कि देशभर में यह संदेश जा रहा है कि सरकार संसद से भाग रही है और छात्रों, युवाओं तथा आम लोगों के बीच इसे लेकर प्रतिक्रिया हो रही है, तब उसने स्पीकर को पत्र लिखकर बातचीत की इच्छा जताई। इमरान ने सवाल उठाया कि सरकार ने यह पहल पहले क्यों नहीं की।
वहीं, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने पूरे सत्र को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा संबंधी विधेयक पर चर्चा हुई, लेकिन कई विधेयक बिना पर्याप्त चर्चा के पारित कर दिए गए, जबकि कुछ विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (सीजेपी) के पास भेजा गया। उनका आरोप है कि प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान भी सदस्यों को कई मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। कार्ति ने कहा कि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है और संख्या बल होने के बावजूद उसे विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का मौका देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबा नहीं सकती और न ही यह तय कर सकती है कि विपक्ष कौन से मुद्दे उठाए।
इस बीच उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ हवन को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने इसे दलितों के प्रति भाजपा और आरएसएस की मानसिकता से जोड़ते हुए तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने इस घटना को बेहद गलत और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि अगर खड़गे जैसे दलित नेता किसी बैठक या राजनीतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हैं और उसके बाद ‘शुद्धिकरण’ की रस्म की जाती है, तो यह राजनीति के बेहद निचले स्तर को दर्शाता है। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले पर स्पष्ट बयान देने की मांग की।
कांग्रेस सांसद अमन सिंह ने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा की सोच समाज में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्गों की भागीदारी को स्वीकार नहीं करने वाली है। वहीं इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि खड़गे देश के बड़े दलित नेताओं में हैं और लंबे संसदीय जीवन में उन्होंने देश की सेवा की है। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रधानमंत्री से सवाल किया कि खड़गे के कार्यक्रम के बाद ‘शुद्धिकरण’ क्यों किया गया।
–आईएएनएस
एसएके/वीसी
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