Medical Education Reforms: देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा एमबीबीएस छात्रों के लिए शुरू की गई ऑनलाइन फीडबैक प्रणाली को चिकित्सा जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। लंबे समय से डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती संख्या और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता जता रहे थे। ऐसे में छात्रों को मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा बनाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एनएमसी द्वारा शुरू किया गया “स्टूडेंट फीडबैक फॉर्म” छात्रों को गुमनाम और गोपनीय तरीके से अपनी राय रखने का अवसर देता है। इसमें शिक्षण गुणवत्ता, संकाय की उपलब्धता, नैदानिक प्रशिक्षण, प्रयोगशालाएं, विच्छेदन कक्ष, सामुदायिक और ग्रामीण प्रशिक्षण, छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, पाठ्यक्रम और कॉलेज प्रशासन जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली छात्रों के वास्तविक अनुभवों को सामने लाने में मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस फीडबैक प्रणाली को मजबूत सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू किया गया, तो यह भारतीय चिकित्सा शिक्षा में बड़ा बदलाव ला सकती है। अन्यथा, यह पहल भी केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाने का जोखिम रखती है।
सफलता के लिए ठोस कार्रवाई की अनिवार्यता
इस पहल का स्वागत किया गया है, लेकिन इसकी सफलता को लेकर डॉक्टरों ने सावधानी भी बरतने की बात कही है। आईएमए-जेडीएन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. इंद्रनील देशमुख का कहना है कि यह प्रणाली तभी सफल होगी जब प्राप्त फीडबैक पर ठोस कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने गोपनीयता और विश्वास को इस पहल की नींव बताया।
समयबद्ध सुधार की आवश्यकता
फेमा डॉक्टर्स एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन ने इसे एक बहुत जरूरी सुधार बताया। उनके अनुसार, यह पहली बार है जब छात्रों को औपचारिक रूप से चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख हितधारक के रूप में मान्यता मिली है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि केवल डेटा संग्रह पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उस पर पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।
गोपनीयता सुनिश्चित करने और दुरुपयोग रोकने की चुनौती
फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के प्रतिनिधियों ने भी कहा कि यदि फीडबैक देने वाले के नाम को गुप्त रखना सुनिश्चित नहीं होगी और दुरुपयोग को नहीं रोका गया, तो यह प्रणाली केवल औपचारिकता बनकर रह सकती है।
एनएमसी एक्ट 2019 के तहत पारदर्शिता की मांग
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल ने इस पहल का समर्थन करते हुए भी एनएमसी पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एनएमसी एक्ट 2019 के तहत मेडिकल कॉलेजों की मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक करना अनिवार्य है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा।


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