National Farmers Day 2025: देश की रीढ़ और देशभर में लोगों का पेट भरने वाले किसानों के योगदान के लिए आज राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। भारत देश में करोड़ों लोग खेती से जुड़े हुए है और देश के योगदान में अहम भूमिका निभाते है। आज के दिन अन्नदाता, किसानों का समपर्ण और योगदान को सम्मान देने के लिए किसान दिवस देशभर में मनाया जाता है। साथ ही किसानो के मसीहा चौधरी चरण सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में भी यह दिन मनाया जाता है।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत रत्न से सम्मानित चौधरी चरण सिंह को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह देश राष्ट्र निर्माण में, विशेष रूप से कृषि, ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय के क्षेत्रों में उनके अमूल्य योगदान को कभी नहीं भूल सकता।
National Farmers Day 2025

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने छोटे किसानों के कल्याण के लिए कठिन परिश्रम किया और यह सुनिश्चित किया कि उनकी चिंताओं को राष्ट्रीय नीति निर्माण के केंद्र में रखा जाए। साथ ही ग्रामीण भारत को मजबूत करने और कृषि समुदाय को सशक्त बनाने के उनके प्रयासों को देश हमेशा याद रखेगा। वर्तमान सरकार चौधरी चरण सिंह के आदर्शों और दृष्टिकोण से प्रेरणा लेती है और लघु खेती को बढ़ावा देने, किसानों को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कई कदम चौधरी चरण सिंह के निर्धारित सिद्धांतों पर आधारित हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के साथ-साथ कृषि की प्रगति और किसानों की समृद्धि के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता। pic.twitter.com/naGrTf5mVM
— Narendra Modi (@narendramodi) December 23, 2025
Kisan Diwas 2025

वर्ष 2001 में राष्ट्रीय किसान दिवस की शुरुआत की गई थी और अटल सरकार के दौरान देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह की जयंती को किसान दिवस पर मनाने का निर्णय लिया गया था। किसान दिवस का उद्देश्य किसानों को और उनके समपर्ण पर राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देना और उनके अधिकारों की जानकारी देना शामिल है। बता दें कि आज के दिन किसानों को खेती की नई तकनीकों, किसानो के लाभ में योजनाओं के बारे में अवगत कराया जाता है।
Who is Chaudhary Charan Singh
चौधरी चरण सिंह का जन्म 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ था। उनके प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि ने ग्रामीण मुद्दों और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों की उनकी गहरी समझ को आकार दिया। उन्होंने 1923 में विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1925 में आगरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। कानून की पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने पहले गाजियाबाद में वकालत शुरू की और 1929 में मेरठ चले गए। इसी दौरान वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की।
वे पहली बार 1937 में छपराउली निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने 1946, 1952, 1962 और 1967 में कई बार इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1946 में, वे पंडित गोविंद बल्लभ पंत के नेतृत्व वाली सरकार में संसदीय सचिव बने, जहाँ उन्होंने राजस्व, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य, न्याय एवं सूचना सहित कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला।
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