सरकार का बड़ा फैसला, NEET-PG 2025 कट-ऑफ घटाकर 0; माइनस स्कोर वाले भी बन सकेंगे स्पेशलिस्ट डॉक्टर!

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NEET PG 2025 Cutoff Revised: आमतौर पर डॉक्टर बनने के लिए लंबी पढ़ाई और कठिन परीक्षाएं पास करना जरूरी माना जाता है। लेकिन केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (NBEMS) के एक हालिया फैसले ने इस धारणा को उलट दिया है। NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को लगभग समाप्त कर दिया गया है, जिससे अब माइनस स्कोर हासिल करने वाले उम्मीदवार भी दाखिले के लिए पात्र हो गए हैं। NEET PG 2025 Cut-off: निगेटिव स्कोर वाले बच्चे भी काउंसलिंग में शामिल होंगे शामिल बता दें कि सरकार के इस फैसले के बाद वे अभ्यर्थी भी MD और MS…

NEET PG 2025 Cutoff Revised: आमतौर पर डॉक्टर बनने के लिए लंबी पढ़ाई और कठिन परीक्षाएं पास करना जरूरी माना जाता है। लेकिन केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (NBEMS) के एक हालिया फैसले ने इस धारणा को उलट दिया है। NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को लगभग समाप्त कर दिया गया है, जिससे अब माइनस स्कोर हासिल करने वाले उम्मीदवार भी दाखिले के लिए पात्र हो गए हैं।

NEET PG 2025 Cut-off: निगेटिव स्कोर वाले बच्चे भी काउंसलिंग में शामिल होंगे शामिल

NEET PG 2025 Cutoff Revised
NEET PG 2025 Cutoff Revised

बता दें कि सरकार के इस फैसले के बाद वे अभ्यर्थी भी MD और MS की सीटों की काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे, जिनका स्कोर निगेटिव में, यहां तक कि माइनस 40 तक रहा है। आमतौर पर प्रवेश परीक्षाओं में न्यूनतम कट-ऑफ अंक अनिवार्य होते हैं, लेकिन इस बार NBEMS ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस निर्णय को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इसे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सीटें भरने के प्रयास के रूप में मान रहे हैं। कुल मिलाकर यह फैसला चर्चा और बहस का बड़ा विषय बन गया है।

NEET PG Counselling 2025: खाली 18 हजार PG सीटें भरने को बड़ा फैसला

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक ऑटोनॉमस बॉडी, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, NEET-PG 2025 काउंसलिंग के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल कम कर दिया है। इसे आरक्षित कैटेगरी के लिए घटाकर शून्य परसेंटाइल कर दिया गया है। यह कदम देश भर के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में राउंड-2 काउंसलिंग पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में खाली पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों – 18,000 से ज़्यादा PG सीटों – को भरने के लिए उठाया गया है।

NEET PG 2025 Cutoff Revised: कट-ऑफ में क्या हुआ बदलाव?

पिछले परसेंटाइल थ्रेशहोल्ड ने सीटों की उपलब्धता के बावजूद योग्य उम्मीदवारों की संख्या को सीमित कर दिया था। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने 12 जनवरी को औपचारिक रूप से क्वालिफाइंग कट-ऑफ में बदलाव का अनुरोध किया था, जिसमें सीटों की बर्बादी को रोकने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता का हवाला दिया गया था।

मेडिकल विशेषज्ञ बढ़ाने को बड़ा फैसला

सूत्रों ने कहा, “इस बदलाव का मकसद उपलब्ध सीटों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है, जो भारत में प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। ऐसी सीटों को खाली छोड़ने से स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार के राष्ट्रीय प्रयासों को नुकसान होता है और मूल्यवान शैक्षिक संसाधनों का नुकसान होता है।” NEET-PG एक रैंकिंग सिस्टम के रूप में काम करता है ताकि सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग के ज़रिए सीटों का पारदर्शी, योग्यता-आधारित आवंटन हो सके।

NEET Cut Offs Changed: NBEMS ने दी सफाई

NBEMS के अनुसार, हालांकि क्वालिफाइंग कट-ऑफ कम कर दिया गया है, NEET-PG 2025 रैंक पहले प्रकाशित की गई रैंक के अनुसार ही रहेंगी। बोर्ड ने अपने आधिकारिक नोटिस में कहा, “योग्यता अस्थायी है और एडमिशन के समय MBBS/FMGE कुल अंकों, फेस ID, या बायोमेट्रिक जांच के ज़रिए वेरिफाई की जाएगी।” इसने यह भी चेतावनी दी कि आवेदन में दी गई गलत या झूठी जानकारी – खासकर अगर इसका इस्तेमाल टाई-ब्रेकिंग में किया जाता है – तो उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी।

योग्यता के आधार पर ही सीट आवंटन

इस बदलाव के साथ, आवंटन केवल अधिकृत काउंसलिंग सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा; कोई सीधा या विवेकाधीन एडमिशन की अनुमति नहीं है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। आपसी योग्यता और पसंद-आधारित आवंटन सीट वितरण का मार्गदर्शन करना जारी रखेंगे। इसके अलावा, शैक्षणिक मानकों में कोई कमी नहीं होगी। संशोधित परसेंटाइल केवल पहले से योग्य MBBS डॉक्टरों के बीच पात्रता का विस्तार करता है।

NEET-PG 2025 कट-ऑफ को 0 क्यों किया गया?

1. अभ्यर्थियों को बड़ी राहत – कट-ऑफ 0 करने से अधिक संख्या में उम्मीदवार काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।

2. खाली सीटें भरने की कोशिश– कई मेडिकल कॉलेजों में खाली PG सीटों को भरने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है।

3. मेरिट पर काउंसलिंग होगी– कट-ऑफ 0 होने के बावजूद सीटों का आवंटन मेरिट और रैंक के आधार पर ही होगा।

4. अस्थायी निर्णय की संभावना – यह फैसला अंतिम राउंड या विशेष परिस्थितियों में लिया जा सकता है।

5. गुणवत्ता को लेकर बहस– कट-ऑफ घटाने से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल भी उठ सकते हैं।

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।