उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने आज पाकिस्तान का नाम लिये बिना कहा कि वह सीमा पार आतंकवाद को एक नीति के रूप में बढावा दे रहा है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस तरह की नीति अपनाने वाले देशों को अलग-अलग कर देना चाहिए। उप राष्ट्रपति ने आज हरियाणा के मानेसर में राष्ट्रीय सुरक्षा गारद के 33 वें स्थापना दिवस पर अपने संबोधन में कहा, ‘हमारे पडोसी ने आतंकवादियों को सहायता, धन मुहैया कराने और प्रशिक्षण देने को अपनी नीति बना लिया है।’
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस समस्या से निपटने के लिए एकजुट हो जाये। नायडू ने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता तथा न ही वह सीमाओं से बंधा है और किसी को भी विचारधारा के नाम पर हिंसा की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। नायडू ने आतंकवाद विरोधी अभियानों में पुख्ता खुफिया जानकारी की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि इस तरह की सूचनाएं गोला बारूद तथा हथियारों पर भी भारी पड़ती हैं।
उन्होंने कहा, ‘पारदर्शिता तथा जवाबदेही जरूरी है। कई बार पुखता जानकारी हथियार और गोला बारूद पर भी भारी पड़ती है।’ देश की सुरक्षा में सराहनीय योगदान के लिए एनएसजी की प्रशंसा करते हुए नायडू ने कहा कि पिछले तीन दशक से भी अधिक समय से बल के कमांडो आतंकवादी हमलों तथा विमान अपहरण जैसी घटनाओं से बखूबी निपट रहे हैं। अक्षरधाम मंदिर पर हमले, मुंबई आतंकवादी हमले तथा पठानकोट पर आतंकवादियों के हमले के दौरान एनएसजी कमांडों की कार्रवाई को देश कभी नहीं भुला सकता।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद की चुनौती बहुत बड़ी है और इससे निपटने के लिए सुरक्षा बलों को अपनी रणनीति और तौर तरीकों को नयी धार देनी होगी । राज्य पुलिस बलों को भी मजबूत बनाये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि एनएसजी पुलिस बलों को प्रशिक्षण देकर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नायडू ने इस मौके पर एनएसजी का पोस्टल कवर भी जारी किया ।


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