मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति पर राजीव रंजन का कांग्रेस पर हमला

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राजीव रंजन ने कांग्रेस को याद दिलाया 1996 का इतिहास

देश के अगले मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बैठक में सोमवार को उनके नाम पर मुहर लगी। लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं चयन समिति का हिस्सा रहे राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता इस पर सवाल उठा रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय महासचिव राजीव रंजन ने पलटवार करते हुए मंगलवार को कहा कि कांग्रेस के जमाने में उनके मनमर्जी के आधार पर महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति होती थी।

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव रंजन ने कहा, “मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के लिए देश में संवैधानिक प्रावधान उपलब्ध हैं। पहले कांग्रेस के जमाने में उनकी मनमर्जी से इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति होती थी। नियुक्ति के लिए कोई एक्ट नहीं था। वहीं, यह राहुल गांधी की असहमति के बावजूद बहुमत से लिया गया यह फैसला है। इस विषय पर बोलने का कांग्रेस के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस को खुद का इतिहास खंगालना चाहिए। साल 1996 में कांग्रेस के कार्यकाल में एम.एस. गिल देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त हुए और 2001 तक उनका कार्यकाल रहा। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की मदद की। बाद में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ले ली। राज्यसभा के लिए उन्हें नामांकित किया गया। फिर केंद्रीय मंत्री परिषद का उन्हें हिस्सा बनाया गया। इसलिए, कम से कम कांग्रेस ऐसे सवालों पर न ही बोले तो ज्यादा बेहतर होगा।

राजीव रंजन ने कहा कि देश में संविधान है, जो सर्वोपरि है। हर बड़े फैसले में संविधान में वर्णित प्रावधानों का पालन किया जाता रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने सोमवार शाम दिल्ली में बैठक की थी। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के उत्तराधिकारी के तौर पर ज्ञानेश कुमार को भारत का नया मुख्य चुनाव आयुक्त चुना गया था। राहुल गांधी की आपत्ति के बाद यह फैसला बहुमत के आधार पर लिया गया। अब कांग्रेस समेत कई विरोधी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं।

News Desk

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