भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्रमुख ब्याज दर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि एमपीसी ने रेपो रेट को चार फीसदी पर बरकार रखने का फैसला लिया है। रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है।
इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर बरकरार रहेगी। शक्तिकांत दास ने कहा कि खाद्यान्नों के उत्पादन में देश में नया रिकॉर्ड बन सकता है। उन्होंने कहा कि मानसून बेहतर रहने और खरीफ फसलों के रबके में इजाफा होने से खाद्यान्नों के उत्पादन में नया रिकॉर्ड बन सकता है।
शक्तिकांत दास ने अर्थव्यवस्था में सुधार के लक्षणों का जिक्र करते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में पॉजिटिव ग्रोथ देखने को मिल सकता है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लक्षण दिखने लगे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा मजबूती है।
जीडीपी में इस साल 9.5 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन चली समीक्षा बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने यह अनुमान व्यक्त किया। इससे पहले केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी अनुमान के अनुसार पहली तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आयी है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान में निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है। दास ने कहा, ‘‘अप्रैल- जून तिमाही में अर्थव्यवस्था में आई गिरावट अब पीछे रह गयी है और अर्थव्यवस्था में उम्मीद की किरण दिखने लगी है …।’’ उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र और ऊर्जा खपत में तेजी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति भी 2020-21 की चौथी तिमाही में कम होकर तय लक्ष्य के दायरे में आ सकती है।
उल्लेखनीय है कि खुदरा मुद्रास्फीति हाल के महीनों में छह प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई। आरबीआई मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) पर गौर करता है। सरकार ने आरबीआई को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया हुआ है। दास ने कहा कि जीडीपी में चालू वित्त वर्ष में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और जनवरी-मार्च तिमाही में यह सकारात्मक दायरे में पहुंच सकती है।


Download Android App
Download iOS App



