SC Hearing On Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर राज्य सरकारों की लापरवाही पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकारें सिर्फ कागजों में काम दिखा रही हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कई राज्यों की रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखीं, जिनमें भारी खामियां सामने आईं।
बुधवार की सुनवाई में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच का रवैया बेहद सख्त रहा। कोर्ट ने राज्य सरकारों के वकीलों को आगे बुलाकर जवाब मांगा और अन्य हस्तक्षेप करने वालों को पीछे हटने को कहा। बेंच ने कहा कि पहले व्यवस्था को सुधारना जरूरी है, केवल बहस से कुछ नहीं होगा।
SC Hearing On Stray Dogs: जनवरी 2025 में ही असम के अंदर दर्ज हुए 20,900 केस
असम सरकार की रिपोर्ट देखकर कोर्ट सबसे ज्यादा हैरान हुई। साल 2024 में कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले सामने आए। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या बेहद चिंताजनक है। इसके बावजूद असम में कुत्तों के लिए पर्याप्त सेंटर नहीं हैं। एमीकस क्यूरी ने बताया कि राज्य में 318 स्टेडियम हैं, लेकिन आवारा कुत्तों के लिए ढंग की व्यवस्था नहीं है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सरकार के हलफनामे में कर्मचारियों की जानकारी तक नहीं दी गई। असम सरकार ने सुधार के लिए छह महीने का समय मांगा है।

Stray Dogs Case: झारखंड पर फर्जी आंकड़ों का आरोप
झारखंड सरकार ने दावा किया कि उसने करीब 1.89 लाख कुत्तों की नसबंदी करवाई है। जब कोर्ट ने जांच की तो पता चला कि इनमें से 1.6 लाख नसबंदी सिर्फ दो महीनों में दिखाई गई है। इस पर जजों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह आंकड़े पूरी तरह अवास्तविक हैं। कोर्ट ने सवाल किया कि एक दिन में एक गाड़ी से कितने कुत्ते पकड़े जा सकते हैं। बेंच ने झारखंड की रिपोर्ट को मनगढ़ंत करार दिया।
Supreme Court News: स्कूल और अस्पतालों में कुत्तों पर रोक जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों में आवारा कुत्तों को हटाने पर जोर दिया। एमीकस क्यूरी ने बताया कि कर्नाटक ने ऐसे संस्थानों की पहचान तो की है, लेकिन अब तक एक भी कुत्ता वहां से नहीं हटाया गया। कोर्ट ने कहा कि हर स्कूल और कॉलेज के चारों ओर बाउंड्री वॉल होना जरूरी है ताकि बच्चों की सुरक्षा बनी रहे। हरियाणा जैसे कुछ राज्यों के हलफनामों में इस विषय पर कोई जानकारी ही नहीं दी गई। कोर्ट ने चेतावनी दी कि गलत और अधूरी रिपोर्ट अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
गोवा और केरल में टूरिज्म पर खतरा
सुनवाई में गोवा और केरल के समुद्र तटों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर भी चिंता जताई गई। एमीकस क्यूरी ने बताया कि गोवा के बीच पर कुत्ते खाने-पीने के बचे हुए सामान पर निर्भर रहते हैं, जिससे पर्यटकों को परेशानी हो रही है। जजों ने कहा कि हाल ही में उन्होंने खुद यह स्थिति देखी है। कोर्ट का मानना है कि इन कुत्तों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना जरूरी है, जहां उनकी देखभाल हो सके।

गुजरात का बजट, लेकिन व्यवस्था कमजोर
गुजरात सरकार ने बताया कि उसने इस समस्या के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट रखा है और अगले साल 75 करोड़ का प्रावधान किया गया है। हालांकि कोर्ट गुजरात की रिपोर्ट से भी संतुष्ट नहीं दिखी। डॉग पाउंड और शेल्टर को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली रिपोर्ट में सही और पूरी जानकारी दी जाए।
हाईवे पर मवेशियों से होने वाले हादसों पर भी चिंता
कोर्ट ने सिर्फ कुत्तों ही नहीं, बल्कि हाईवे पर घूम रहे आवारा पशुओं से होने वाले हादसों का मुद्दा भी उठाया। एनएचएआई और राज्य सरकारों को मिलकर उन जगहों की पहचान करने को कहा गया जहां सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं। असम में जंगली जानवरों के लिए बनाई गई एलिवेटेड सड़कों का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा कि मवेशियों के लिए भी समाधान खोजा जाना चाहिए। आंध्र प्रदेश ने बताया कि उसने 14 हजार संस्थानों में फेंसिंग का काम शुरू किया है। लेकिन कोर्ट ने नसबंदी सेंटर्स की क्षमता का ऑडिट कराने की जरूरत बताई।

कोर्ट जल्द ले सकता है सख्त फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अब सिर्फ बातें नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। कोर्ट ने यह भी माना कि कभी-कभी पालतू कुत्ते भी काट लेते हैं, इसलिए सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं। बेंच ने संकेत दिए हैं कि अगर राज्य सरकारें अगली सुनवाई तक सुधार नहीं दिखातीं, तो उनके खिलाफ सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं।
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