Sukesh Chandrashekhar Case : केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े बहुचर्चित मामले में रोहिणी जेल के पूर्व अधीक्षक सुनील कुमार को आंशिक राहत प्रदान की है। आयोग ने दिल्ली जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह आरटीआई के तहत मांगी गई कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराए, जिन्हें सुनील कुमार ने अपने बचाव के लिए आवश्यक बताया है।
हालांकि, सुरक्षा और तीसरे पक्ष की निजता से जुड़ी अधिकांश सूचनाओं को देने से आयोग ने इनकार कर दिया। सुनील कुमार उन जेल अधिकारियों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कथित 200 करोड़ रुपये की रंगदारी मामले में आरोप लगाए हैं।
आरोप है कि वर्ष 2020-21 के दौरान रोहिणी जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर को जेल नियमों के विपरीत विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। अपने बचाव की तैयारी के लिए सुनील कुमार ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत 10 अलग-अलग आवेदन दाखिल कर जेल से जुड़े कई रिकॉर्ड मांगे थे।
निजी जानकारी और सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं जाएंगी हटाई
जेल में उनके आने-जाने का रिकॉर्ड, विजिटिंग जजों की निरीक्षण रिपोर्ट, बैरकों का विवरण, सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और निगरानी संबंधी जानकारी, तलाशी रिपोर्ट, खाली बैरकों का ब्यौरा तथा सुकेश चंद्रशेखर के स्थानांतरण और जेल में ठहरने से जुड़े दस्तावेज शामिल थे। सुनवाई के दौरान सुनील कुमार ने आयोग को बताया कि उन्हें जेल नियमों के उल्लंघन के आरोप में आपराधिक मामले में फंसाया गया है और मांगी गई जानकारी उनके बचाव के लिए बेहद जरूरी है।
सूचना आयुक्त आनंदी रामलिंगम ने दिल्ली जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि सुनील कुमार को जेल में उनके आने-जाने का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, इसमें तीसरे पक्ष की निजी जानकारी और सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं हटाई जाएंगी। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि वर्ष 2020 में लगाए गए नए सीसीटीवी कैमरों का नियंत्रण जेल प्रशासन ने किस तारीख को अपने हाथ में लिया, इसकी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।
“अगर कोई वैध अपवाद लागू नहीं होता है तो…”
इसके अलावा आयोग ने उस अवधि के दौरान खाली बैरकों की कुल संख्या के संबंध में संशोधित जवाब देने के निर्देश दिए। आयोग ने टिप्पणी की कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने सूचना देने से इनकार करते समय आरटीआई अधिनियम की धारा 8 के तहत किसी विशिष्ट अपवाद का उल्लेख नहीं किया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई वैध अपवाद लागू नहीं होता है तो सूचना उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
सीसीटीवी निगरानी रिकॉर्ड से संबंधित एक अन्य अपील में भी आयोग ने जेल अधिकारियों को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के निर्देशों के अनुरूप संशोधित जवाब जारी करने और यह स्पष्ट करने का आदेश दिया कि करीब एक वर्ष बीत जाने के बावजूद उन निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
हालांकि, आयोग ने सुनील कुमार की अन्य अपीलों को खारिज करते हुए माना कि जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और तीसरे पक्ष की निजता से संबंधित सूचनाओं पर आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जी) और 8(1)(जे) के तहत छूट का उचित उपयोग किया है। इससे सुनील कुमार को सीमित राहत तो मिली है, लेकिन अधिकांश संवेदनशील रिकॉर्ड फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे।
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