Supreme Court on Sajjan Kumar: 1984 सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार को अभी जेल में ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग और बीमार पत्नी से मिलने के लिए जमानत पर रिहा करने का आदेश देने से इंकार कर दिया है। अपनी याचिका में सज्जन कुमार का कहना था कि वो 7 साल से भी ज्यादा समय से तिहाड़ जेल में बंद है। उनकी पत्नी की सेहत बहुत खराब है।
कोर्ट ने जमानत देने से इंकार किया
इस बीच वो एक बार भी अपनी पत्नी से नहीं मिल पाए हैं। कोर्ट ने जमानत देने से इंकार करते हुए कहा कि हाईकोर्ट से मिली सजा के खिलाफ सज्जन कुमार की अपील पर हम जुलाई में सुनवाई करेंगे। जिसके बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। कमेटी ने स्पष्ट किया है कि सज्जन कुमार और इस नरसंहार के अन्य दोषियों के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक पीड़ितों को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता।
जेल से बाहर आने की फिराक में
दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने बताया कि सज्जन कुमार लंबे समय से जेल से बाहर आने की फिराक में था। अदालत ने साफ किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती और अब इस केस की नियमित सुनवाई जुलाई से शुरू की जाएगी। सुनवाई के दौरान अदालत में कमेटी के महासचिव जगदीप सिंह काहलो अपनी टीम के साथ मौजूद रहे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी उपस्थित
उन्होंने बताया कि इस केस में कमेटी की ओर से एडवोकेट गुरबख्श सिंह, वरिष्ठ वकील एच. एस. फूलका और आर. एस. चीमा ने मजबूती से पक्ष रखा। साथ ही भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी उपस्थित हुए। कालका और काहलो ने इस सहयोग के लिए भारत सरकार का भी आभार व्यक्त किया। कालका ने कहा कि दिल्ली कमेटी 1984 कत्लेआम के हर मामले की पैरवी पूरी शिद्दत से कर रही है। हमारा लक्ष्य हर उस दोषी को सलाखों के पीछे पहुंचाना है जिसने सिखों के साथ अन्याय किया। उन्होंने दोहराया कि चाहे कानूनी लड़ाई कितनी भी लंबी और कठिन क्यों न हो, कमेटी पीछे नहीं हटेगी।
ALSO READ: मासूम बच्चे का कत्ल, 31 साल तक पुलिस को चकमा, पुलिस ने सलीम वास्तिक को किया गिरफ्तार


Download Android App
Download iOS App




