‘भविष्य में चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी रखा जाए’, महिला अफसरों के हक में Supreme Court, स्थायी कमीशन पर बड़ा फैसला

Summary :

Supreme Court Women Officers Permanent Commission Verdict: सर्वोच्च न्यायालय सेना की महिला अधिकारियों से जुड़े एक मुद्दे पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इन महिला अधिकारियों को एक बड़ी राहत दी है. शॉर्ट सर्विस कमीशन की महिला अधिकारियों द्वारा दायर एक याचिका पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि उन्हें परमानेंट कमीशन देने के मामले में एक भेदभाव से भरा रवैया अपनाया गया था। Supreme Court Women Officers Permanent Commission Verdict: कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा है कि 2019, 2020 और 2021 में सेलेक्शन बोर्ड द्वारा स्थायी कमीशन के…

Supreme Court Women Officers Permanent Commission Verdict: सर्वोच्च न्यायालय सेना की महिला अधिकारियों से जुड़े एक मुद्दे पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इन महिला अधिकारियों को एक बड़ी राहत दी है. शॉर्ट सर्विस कमीशन की महिला अधिकारियों द्वारा दायर एक याचिका पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि उन्हें परमानेंट कमीशन देने के मामले में एक भेदभाव से भरा रवैया अपनाया गया था।

Supreme Court Women Officers Permanent Commission Verdict: कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ?

Supreme Court Women Officers Permanent Commission Verdict
Supreme Court Women Officers Permanent Commission Verdict (Source: Social Media)

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा है कि 2019, 2020 और 2021 में सेलेक्शन बोर्ड द्वारा स्थायी कमीशन के लिए चुनी गई महिला अधिकारियों की नियुक्ति बरकरार रहेगी। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि भेदभाव की वजह से कई महिला अधिकारी स्थायी कमीशन का लाभ नहीं उठा पाई थी। इसलिए जिन महिलाओं के नाम पर 2019, 2020 और 2021 में यह निणर्य लिया गयाथा, उनकी सेवा 20 साल मानी जाएगी और उन्हें पेंशन का लाभ भी दिया जाएगा।

Supreme Court News: सेना की महिला अधिकारियों की क्या मांग थी?

Supreme Court News
Supreme Court News (Source: Social Media)

सुप्रीम कोर्ट ने आगे यह भी कहा, ‘भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी रखा जाएगा. हर वर्ष केवल 250 महिलाओं को ही स्थाई कमीशन देने की सीमा नहीं रहेगी. कोर्ट ने साफ कहा कि खास हालात में तय सीमा से आगे भी जाना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि स्थायी कमीशन देने का निर्णय सिर्फ योग्यता के आधार पर मिलना चाहिए, ना कि किसी तय सीमा के हिसाब-किताब के आधार पर। बता दें कि यह फैसला थल सेना, वायु सेना और नौसेना की महिला अधिकारियों की अलग-अलग याचिकाओं पर कोर्ट की तरफ से सुनाया गया है।

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।