Unnao Rape Case Victim Statement: उन्नाव राव केस के आरोपी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने और उन्हें जमानत देने के बाद बवाल मचा हुआ है। पीडिता ने अपने परिवार के साथ धरना दिया था साथ ही नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात थी इसी बीच अब यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेगा। एक अधिकारी ने बताया कि जांच एजेंसी ने उन्नाव बलात्कार मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पारित आदेश की जांच की है और जल्द से जल्द सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने का निर्णय लिया है।
Unnao Rape Case Victim Statement

अभियुक्त ने जमानत याचिका के साथ अपील दायर की, जिसका सीबीआई और पीड़िता के परिवार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में कड़ा विरोध किया। सीबीआई ने समय रहते जवाब दाखिल कर याचिका का विस्तार से लिखित खंडन पेश किया। बता दें कि न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दे दी, उन्हें 15 लाख रुपये का जमानत बांड जमा करने की शर्त पर जमानत दी गई है। लेकिन पीड़ित के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उन्हें अभी तक जमानत नहीं मिली है, इसलिए वे हिरासत में ही रहेंगे। दिल्ली उच्च न्यायालय में उनकी अपील और सजा निलंबित करने की अर्जी लंबित है।
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जमानत देते समय, उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि सेंगर दिल्ली में पीड़िता के निवास स्थान के 5 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश न करें। यह भी निर्देश दिया गया कि सेंगर दिल्ली में ही रहें और पीड़िता के परिवार से संपर्क न करें। वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन और अधिवक्ता एसपी एम त्रिपाठी कुलदीप सिंह सेंगर की ओर से पेश हुए। उन्होंने बताया कि कुलदीप सिंह सेंगर सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। यह भी कहा गया कि पीड़िता की उम्र विवादित है, क्योंकि विभिन्न दस्तावेजों में उम्र अलग-अलग बताई गई है। ऐसी स्थिति में, उसकी उम्र के संबंध में चिकित्सा रिपोर्ट पर विचार किया जाना चाहिए।
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पीड़ित ने इंडिया गेट परिसर में बैठकर आरोप लगाया कि आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के कारण जमानत दी गई थी। मैंने फैसला सुना और मुझे बहुत बुरा लगा। मेरा मन किया कि मैं वहीं आत्महत्या कर लूं, लेकिन अपने परिवार के बारे में सोचकर मैंने खुद को रोक लिया। हमारे साथ अन्याय हुआ है। चुनाव आ रहे हैं और उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया है ताकि उसकी पत्नी चुनाव लड़ सके। अगर बलात्कार का ऐसा आरोपी बाहर आएगा तो हम कैसे सुरक्षित रहेंगे?” पीड़िता ने जमानत रद्द करने की भी मांग की, यह कहते हुए कि जमानत आदेश के बाद वह डरी हुई है।


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