मुंबई, 24 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव यूपी के सीएम रहे हैं और अगर उन्होंने अपने कार्यकाल में लोगों के रोजगार के बारे में सोचा होता तो लोगों को महाराष्ट्र नहीं आना पड़ता।
महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने पर यूपी-बिहार के चालकों को भाषा सीखने में आई दिक्कतों पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लंबा-चौड़ा पोस्ट किया।
उन्होंने लिखा कि एक तो भाजपा सरकार नौकरी-रोजगार नहीं दे रही है, तो दूसरी तरफ जो अपनी रोजी-रोटी अपनी मेहनत से कमा रहे हैं, उन पर भी वार-प्रहार कर रही है। कहीं इसके पीछे भी कमीशनखोरी का खेल तो नहीं है। हो सकता है कि भाजपा को कमीशन का लालच देकर ‘गाड़ियों की बड़ी कंपनियां’ आम जनता की सवारी ‘आटो-रिक्शा’ ही बंद करवाना चाहती हों, जिससे लोग बड़ी कंपनियों की महंगी गाड़ियों से चलने के लिए बाध्य हो जाएं।
अखिलेश के बयान पर मंत्री प्रताप सरनाईक ने जवाब देते हुए कहा कि मैं अखिलेश यादव से यह कहना चाहता हूं। देखिए, हम सभी लोगों का सम्मान करते हैं। आज मुंबई, ठाणे और पूरे महाराष्ट्र में कई गैर-मराठी लोग काम कर रहे हैं। अगर अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में पर्याप्त रोजगार पैदा किए होते तो लोग यहां क्यों आते? ऐसे आरोप लगाने से पहले उनको अपने राज्य पर नजर डालनी चाहिए। वह भी अपने राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं और उनके कार्यकाल के दौरान वहां रोजगार के पर्याप्त अवसर क्यों नहीं पैदा किए गए।
उन्होंने कहा कि महायुति की सरकार महाराष्ट्र में रोजगार पैदा करना जानती है और कर भी रही है। यहां पर देश भर के अलग-अलग राज्यों से सिर्फ उत्तर प्रदेश और बिहार से ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों के लोग रोजी-रोटी की तलाश में महाराष्ट्र आते हैं, तो हम उनका स्वागत करते हैं। महायुति की सरकार रोजगार देने वाली सरकार है, रोजगार छीनने वाली नहीं है। यह निश्चित रूप से असंवैधानिक नहीं है। हमारी अपनी मराठी पहचान और गौरव है। सिर्फ अखिलेश यादव ही नहीं बल्कि हर राज्य के नेताओं ने कहा है कि हर राज्य में उसकी संस्कृति और भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए।
वहीं, शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें सरकार से गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया गया।
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि हम यहां पार्टी नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से मिलने आए थे और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी में बातचीत करनी चाहिए और सभी को कम से कम इस भाषा की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। महाराष्ट्र में कोई भी यह नहीं कह सकता कि ‘मैं मराठी नहीं बोलूंगा।’ यह पूरी तरह से अनुचित व्यवहार है।
उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही, शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना का यही मानना रहा है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए। शिवसेना ने हमेशा लोगों के सामने इस मुद्दे को बहुत गंभीरता और मजबूती से उठाया है। व्यक्तिगत रूप से, मेरा भी मानना है कि अगर कोई महाराष्ट्र या किसी अन्य राज्य में रहता है, तो उसे निश्चित रूप से वहां की स्थानीय भाषा का सम्मान करना चाहिए और उसमें बातचीत करना आना चाहिए। किसी पर जबरदस्ती करने का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन राज्य की भाषा और संस्कृति का सम्मान किया जाना चाहिए।
एक मई से सरकार की ओर से आदेश जारी किया जिसमें बताया गया कि ऑटो चालकों को मराठी भाषा का ज्ञान होना चाहिए। चालकों को तीन माह का समय दिया गया। सभी ऑटो चालकों को कहा गया कि वे मराठी भाषा सीखे। चालकों ने उत्साह भी दिखाया और बहुत सारे लोगों ने सीखा भी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 85 फीसदी चालकों ने मराठी भाषा का ज्ञान अर्जित कर लिया है। हालांकि, कुछ लोग रह गए हैं, उनकी अपनी समस्या होगी। अब उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, मैं उसके पक्ष में नहीं हूं। मुझे लगता है कि उन्हें एक और मौका दिया जाना चाहिए। अगर नहीं सीखते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।
–आईएएनएस
डीकेएम/पीएम
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