राजस्थान : राजस्थान में गौवंश के लिए अब ‘आवारा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं होगा। पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने विधानसभा में यह घोषणा की। कुमावत बुधवार रात विधानसभा में पशुपालन एवं मत्स्य विभाग की अनुदान मांग पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने पशुपालन एवं मत्स्य विभाग की 15.58 अरब रुपए से अधिक की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी।
Highlight :
- राजस्थान में गौवंश को अब ‘आवारा’ नहीं कहा जाएगा
- डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने विधानसभा में की घोषणा
- सदन ने पशुपालन एवं मत्स्य विभाग की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित की
गोवंश को अब नहीं कहेंगे ‘आवारा’
मंत्री ने कहा, राज्य सरकार प्रदेश की बहुमूल्य पशु सम्पदा के विकास एवं पशुधन उत्पादन को बढ़ाकर पशुपालकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्व है। साथ ही, गायों और बैलों के संरक्षण-संवर्धन के लिए संवेदनशील होकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आवारा गौवंश के लिए अब से ‘निराश्रित’ शब्द का प्रयोग किया जाएगा।
पशुपालन विकास कोष का गठन
उन्होंने कहा कि राज्य में 250 करोड़ रूपए के प्रावधान के साथ मुख्यमंत्री पशुपालन विकास कोष का गठन किया जाएगा। साथ ही दुधारू पशुओं के साथ अन्य पशुओं को शामिल करते हुए मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना शुरू की जाएगी। पशुपालकों की सुविधा के लिए चरणबद्ध रूप से सभी जिलों में पशु मेले आयोजित किए जाएंगे।
पशुओं के लिए सरकार ला रही है मंगला पशु बीमा योजना
डेयरी मंत्री मंत्री कुमावत ने कहा कि सरकार अब पशुओं के लिए मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना ला रही है। जिसमें दुधारू पशुओं के साथ अन्य पशुओं को शामिल किया जाएगा। पशुपालकों की सुविधा के लिए चरणबद्ध रूप से सभी जिलों में पशु मेले आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा कुमावत ने कहा कि राज्य में ऊंटों को बढ़ावा देने के लिए पिछली सरकार की शुरू की गई ऊष्ट्र संरक्षण योजना के तहत ऊंटपालकों को दी जाने वाली सहायता राशि 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपए की गई है। बजट में गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना शुरू कर पहले चरण में लगभग 5 लाख गोपालक परिवारों को 1 लाख रूपए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा।
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