Vande Mataram Karnataka : कर्नाटक सरकार द्वारा राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो छंद गाए जाने के आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। एडवोकेट गिरीश भारद्वाज की ओर से वकील अंगद कामथ द्वारा दायर जनहित याचिका को जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट किए जाने की मांग की गई है।
राज्य के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने 8 सितंबर को यह विवादित आदेश जारी किया था। आदेश के मुताबिक सामान्य सरकारी आयोजनों में सिर्फ दो अंतरा गाए जाएंगे (यानी जो पहले गाए जाते रहे हैं), जबकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में ही पूरे छह अंतरा गाए जाएंगे। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय गीत से जुड़ा विषय संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य या समवर्ती सूची में नहीं आता है। यह संसद के अनन्य अधिकार क्षेत्र का मामला है। ऐसे में जो काम राज्य विधायिका कानून बनाकर नहीं कर सकती, उसे सरकार केवल एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से लागू नहीं कर सकती।
याचिका में दावा किया गया है कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 256, 257(1), अनुच्छेद 19(1)(a) और इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) एक्ट 2026 के प्रावधानों के खिलाफ है।
इसके अलावा 3 सितंबर की कैबिनेट बैठक में बिना किसी कैबिनेट नोट या लॉ डिपार्टमेंट की राय के बिना ‘अनौपचारिक चर्चा’ के आधार पर फैसला लेने को ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1977 का उल्लंघन बताया गया है।
केंद्र बनाम राज्य की राजनीति
गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को पत्र जारी कर सभी अवसरों पर 6 अंतरा वाले आधिकारिक रूप को गाने की गाइडलाइंस दी थीं। वहीं कर्नाटक सरकार ने अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा है कि स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम की बड़ी भूमिका रही है और कार्यक्रमों में गरिमा व एकरूपता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
यह आदेश राज्य के सभी प्रमुख सचिवों, पुलिस महानिदेशक, जिला कलेक्टरों और यूनिवर्सिटी के कुलपतियों को भेज दिया गया है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस जारी है।


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