त्रिकुटा की पहाड़ियों पर माता वैष्णो देवी मंदिर जाने के मार्ग में अपनी सेवा देने वाले भारवाहकों, खच्चर मालिकों एवं पालकी सेवा प्रदाताओं के लिए निगरानी प्रणाली पर आधारित रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान उपकरण (एफआरआईडी) से लैस सत्यापन कियोस्क शुरू किया गया है।
यह व्यवस्था सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखकर की गयी है क्योंकि हर साल एक करोड़ श्रद्धालु इस तीर्थस्थल पर आते हैं।श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमेश कुमार ने यह कियोस्क शुरू किया है ताकि कोई अवैध या अनाधिकृत संचालक इस मार्ग पर कार्यरत न हो।
कुमार ने कहा, ‘‘ यह प्रणाली न केवल असली संचालकों के सत्यापन और टट्टूओं, पिट्ठुओं और पालकी वालों की आवाजाही की निगरानी में सुधार लाती है बल्कि संपूर्ण सुरक्षा उपायों को दुरुस्त भी करती है। ’’ उन्होंने कहा कि यह इस मायने में भी काफी अहम है कि किसी आपात स्थिति में धर्मस्थल एवं स्थानीय प्रशासन को इससे समय पर मदद पहुंचाने में मदद मिलेगी।
ये सत्यापन कियोस्क स्मार्ट कार्ड रीडर से जुड़े हैं जिनका संबंध बायोमैट्रिक सूचनाओं, संपर्क सूत्र, पंजीकरण क्रमांक जैसे व्यक्तिगत पहचान एवं सूचनाओं के लिए एमआईएस सर्वर से होता है।


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