देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने बृहस्पतिवार को कहा कि जम्मू में हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना म्यांमा प्रत्यर्पित नहीं किया जायेगा।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने उस याचिका पर यह आदेश पारित किया जिसमें जम्मू में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों को तुरंत रिहा करने और उन्हें म्यांमा प्रत्यर्पित करने से रोकने के लिए केंद्र को निर्देश देने के लिए अनुरोध किया गया था।
केंद्र ने इससे पहले याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि भारत अवैध प्रवासियों की ‘‘राजधानी’’ नहीं बन सकता। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि रोहिंग्या बच्चों की हत्याएं कर दी जाती है और उन्हें यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है तथा म्यांमा की सेना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करने में नाकाम रही है।


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