23 बेगुनाह, 28 साल का इंतजार… क्या अब मिलेगा न्याय? वंधामा कांड की दोबारा जांच शुरू

Summary :

करीब तीन दशक पुरानी केस डायरी, फॉरेंसिक साक्ष्यों और पुलिस रिकॉर्ड खंगाल रही है। SIA यह भी पता लगा रही है कि उस वक्त आतंकियों की मदद करने वाले स्थानीय मददगार या ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) कौन थे, ताकि इतने सालों बाद भी 23 बेगुनाहों के कातिलों को कानून के दायरे में लाया जा सके।

Jammu Kashmir News

Jammu Kashmir News : जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के दौर के दौरान कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर की गई टारगेट किलिंग्स से जुड़े 28 साल पुराने जख्म एक बार फिर हरे हो गए हैं। राज्य जांच एजेंसी ने 25 जनवरी 1998 को गांदरबल जिले के वंधामा गांव में हुए भयावह नरसंहार की फाइलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।

उस खौफनाक रात आतंकियों ने 9 महिलाओं और 4 बच्चों समेत कुल 23 कश्मीरी पंडितों की बर्बरता से हत्या कर दी थी। दशकों तक न्याय का इंतजार कर रहे पीड़ितों के परिवारों के लिए SIA का यह कदम एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है।

डाल दिया था ठंडे बस्ते में

घटना के अगले दिन यानी 26 जनवरी 1998 को गांदरबल पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 22/1998 दर्ज की गई थी। उस वक्त भारतीय सेना की वर्दी पहनकर आए आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों के घरों में घुसकर उन्हें बाहर निकाला और अंधाधुंध गोलियां बरसा दी थीं।

वारदात के बाद आतंकियों ने कुछ मकानों और एक स्थानीय मंदिर को भी आग के हवाले कर दिया था। हालांकि, शुरुआती दौर में जांच एजेंसियों ने अलग-अलग आतंकी संगठनों- जैसे ‘इंतकाम-उल-मुस्लिमून’ और ‘हरकत-उल-अंसार’ के 21 आतंकियों का नाम इसमें शामिल बताया था, लेकिन पुलिस किसी भी आरोपी को अदालत के कटघरे में खड़ा करने में नाकाम रही। नतीजतन, 15 जून 1998 को इस हाई-प्रोफाइल मामले को ‘अनट्रेस्ड’ (Untraced) घोषित कर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

3 दशक रिकॉर्ड खंगाल रही SIA

वर्ष 2012 में कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति ने पुराने दस्तावेजों और सफापोरा मुठभेड़ के आधार पर इस केस की स्वतंत्र जांच की पुरजोर मांग उठाई थी। अब साल 2026 में एसआईए (SIA) ने इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर अपने हाथ में लिया है।

जांच एजेंसी अब करीब तीन दशक पुरानी केस डायरी, फॉरेंसिक साक्ष्यों और पुलिस रिकॉर्ड खंगाल रही है। SIA यह भी पता लगा रही है कि उस वक्त आतंकियों की मदद करने वाले स्थानीय मददगार या ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) कौन थे, ताकि इतने सालों बाद भी 23 बेगुनाहों के कातिलों को कानून के दायरे में लाया जा सके।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।