बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की एक लिमिट तय की गई है।
- 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
- 2 से 5 साल तक के बच्चों के लिए पूरे दिन में 1 घंटा ही स्क्रीन टाइम होना चाहिए, और वह भी केवल एजुकेशनल कंटेंट के लिए।
- 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पढ़ाई के अलावा दिन में 1 से 2 घंटे का स्क्रीन टाइम काफी माना जाता है।
बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के टिप्स (Bacchon ka Screen Time Kaise Kam Kare)

1. खुद रोल मॉडल बनें
बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आसपास देखते हैं। अगर आप खुद बच्चे के सामने दिनभर फोन स्क्रॉल करेंगे, तो बच्चा भी उसी आदत को सीखेगा और हर वक्त मोबाइल इस्तेमाल करने को कहेगा। इसलिए जब आप बच्चों के साथ हों, तो अपना फोन साइड में रखें। उनके साथ बैठकर बातचीत करें और उनके साथ समय बिताएं ।
2. घर में ‘नो स्क्रीन जोन’ बनाएं
बच्चों की बुरी आदतों को सुधारने के लिए घर में कुछ नियम बनाना बहुत जरूरी है। एक रूटीन तय करने से बच्चों को डिसिप्लिन सीखने में मदद मिलती है और वे समय के महत्व को भी समझते हैं। इसके लिए घर के बेडरूम और डाइनिंग टेबल जैसी जगहों को पूरी तरह ‘नो स्क्रीन जोन’ बना दें। खाना खाते समय टीवी या मोबाइल देखना पूरी तरह बंद करें ताकि परिवार के लोग आपस में बात कर सकें। इसके साथ ही सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन को दूर कर दें। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद के हार्मोन पर बुरा असर डालती है, इसलिए सोते समय सभी गैजेट्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखना ही बेहतर है।
3. गैजेट्स के ऑप्शंस ढूंढें
अक्सर जब बच्चों के पास करने के लिए कोई काम नहीं होता, तो वे बोर होकर स्क्रीन की तरफ भागते हैं। उन्हें ऐसे कामों में बीजी रखें जो उनके दिमाग को एक्टिव और क्रिएटिव बनाए। लूडो, कैरम, चेस या पजल जैसी गेम्स में उनका मन आसानी से लग जाता है और इससे उनका मानसिक विकास भी होता है। इसके अलावा पेंटिंग और क्राफ्ट भी अच्छे ऑप्शंस हैं। कलरिंग, क्ले-मॉडलिंग या ओरिगेमी जैसी क्रिएटिव एक्टिविटीज बच्चों के टाइम पास के बेहतरीन तरीके हैं। साथ ही बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत डालें। बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से कहानियों या कॉमिक्स की किताबें लाकर दें, ताकि उनका रुझान पढ़ने की तरफ बढ़े।
4. फिजिकल एक्टिविटीज कराएं
बच्चों की एनर्जी को सही जगह लगाना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्हें केवल घर के अंदर रखने के बजाय बाहर निकलने को भी कहें। उन्हें रोज शाम को कुछ समय के लिए पास के पार्क में खेलने के लिए जरूर भेजें। उन्हें साइकिलिंग, रनिंग, क्रिकेट या फुटबॉल जैसे आउटडोर गेम्स खेलने के लिए कहें, जिससे उनका शारीरिक विकास अच्छा हो। अगर किसी वजह से बाहर जाना मुमकिन न हो, तो घर के छोटे-मोटे कामों में उनकी मदद लें, जैसे कि पौधों में पानी देना आदि।
5. टेक्नोलॉजी का स्मार्ट इस्तेमाल करें
आज के समय में तकनीक को बच्चों के जीवन से पूरी तरह बंद करना मुमकिन नहीं है, लेकिन आप अपनी समझदारी से इसे आसानी से कंट्रोल जरूर कर सकते हैं। इसके लिए मोबाइल और टीवी में पैरेंटल कंट्रोल लगाएं। ऐप्स पर लॉक और टाइमर लगाएं ताकि तय समय सीमा खत्म होते ही वे अपने आप बंद हो जाएं। इसके साथ ही कंटेंट की क्वालिटी पर पूरा ध्यान दें। बच्चा स्क्रीन पर क्या देख रहा है, यह बहुत मायने रखता है। उन्हें सिर्फ एंटरटेनमेंट वाले वीडियो के बजाय कुछ एजुकेशनल शो देखने के लिए ही कहें।



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