Rahat Indori Poetries: “उसकी याद आई है… ” Rahat Indori के चुनिंदा शेर

Summary :

Rahat Indori Poetries: शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम, आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

उसकी याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो,

धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है

दोस्ती जब किसी से की जाए,

दुश्मनों की भी राय ली जाए

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम,

आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो,

ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया,

घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है

मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता,

यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी

तेरी महफ़िल से जो निकला तो ये मंज़र देखा,

मुझे लोगों ने बुलाया मुझे छू कर देखा

अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,

उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते

मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को,

समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।