मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह द्वारा महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर विपक्ष हमलावर हैं। इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार में मंत्री एवं कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने कहा कि परमबीर सिंह ने शायद ‘‘दबाव में आकर’’ देशमुख के खिलाफ वह पत्र लिखा होगा, जिसमें उन्होंने मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। वहीं शिवसेना और एनसीपी खुल कर गृह मंत्री देशमुख का बचाव कर रही है।
कांग्रेस नेता ने ट्विटर पर एक वीडियो संदेश में कहा कि महाराष्ट्र के कांग्रेस प्रभारी एच के पाटिल ने राज्य में पार्टी के नेताओं के साथ विवाद पर चर्चा की और मामले पर उनकी राय समझने की कोशिश की। थोराट ने कहा, ‘‘एच के पाटिल ने दिल्ली से कल इस मुद्दे पर हमसे चर्चा की। उन्होंने हमारी राय समझने की कोशिश की। उन्होंने घटनाक्रम समझने की कोशिश की।’’
थोराट ने कहा कि अगर इस संबंध में कोई भी फैसला किया गया, तो वह महाविकास आघाडी (एमवीए) के घटक दलों (शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस) के बीच चर्चा करने के बाद लिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘मामले की उचित तरीके से जांच की जा रही है। सिंह के पत्र लिखने की मंशा को लेकर हमें संदेह है। हमारी राय में सिंह ने शायद किसी दबाव में आकर वह पत्र लिखा।’’
पवार ने किया देशमुख का बचाव, कहा- फरवरी में तो अस्पताल में भर्ती थे गृह मंत्री, फिर इस्तीफा कैसा
देशमुख के इस्तीफा देने के सवाल पर सिंह ने कहा कि केवल किसी अधिकारी के आरोप लगाने पर मंत्री का इस्तीफा देना ‘‘गलत’’ होगा। थोराट ने कहा, ‘‘परमबीर सिंह की इसको लेकर मंशा जानना भी जरूरी है कि कहीं वह किसी दबाव में तो नहीं थे।’’ परमबीर सिंह ने पत्र में यह भी दावा किया था कि देशमुख चाहते थे कि लोकसभा सदस्य मोहन डेलकर को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला मुंबई में दर्ज किया जाए।
दादरा और नागर हवेली से सात बार के सांसद डेलकर 22 फरवरी को दक्षिण मुम्बई में मरीन ड्राइव पर स्थित एक होटल में मृत पाए गए थे। थोराट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि जब घटना मुम्बई में हुई है, तो एफआईआर यहां दर्ज किए जाने में गलत क्या है।


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