विस्फोट के आरोपी मोहम्मद शारिक (24) के बारे में उपलब्ध जानकारी को भयावह बताते हुए उन्होंने कहा कि आरोपी भारत विरोधी पोस्टर लगाए जाने के मामले में इसलिए जमानत पर बाहर आ गया था क्योंकि गहन जांच नहीं हुई।

उनका इशारा नवंबर 2020 में मंगलुरु शहर में कुछ सार्वजनिक दीवारों पर आतंकवादी समूहों की प्रशंसा करने वाले नारों से संबंधित पोस्टर दिखाई देने की ओर था। इस मामले के संबंध में शारिक को गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।करंदलाजे ने यहां पत्रकारों से कहा, “उसने (शारिक ने) 40 से ज्यादा लोगों को आईएसआईएस का प्रशिक्षण दिया था। यह बात भी सामने आई है कि उसने खुद भी आईएसआईएस का प्रशिक्षण लिया था।”
उल्लेखनीय है कि 19 नवंबर को मंगलुरु में एक ऑटोरिक्शा में विस्फोट हुआ था, जिसे पुलिस ने जांच के बाद आतंकी कृत्य करार दिया था। राज्य सरकार ने आगे की जांच के लिए मामला राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंप दिया था।


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