मुंबई में गुरुवार को शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने पहलगाम हमले के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए और हमले की निंदा की। विधायक महेश सावंत ने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा मजबूत की गई है और केंद्र सरकार को जनता की जवाबदेही तय करनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के खिलाफ मुंबई में गुरुवार को उद्धव ठाकरे (यूबीटी) शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिवसेना के कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथ में तरह-तरह के बैनर लिए कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। प्रदर्शन में शामिल उद्धव ठाकरे (यूबीटी) शिवसेना के विधायक महेश सावंत ने गुरुवार को मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि हम सभी यहां यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि कश्मीर में जो हुआ उसकी निंदा की जाए और ऐसा दोबारा न हो। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है।
ऐसे में दोबारा वहां आतंकी घटना होना संभव नहीं है। हालांकि, हमारे पर्यटक वहां पर फंसे हुए हैं जिन्हें निकालने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि आपको जनता ने भारी मतों से जीत दिलाई। इसलिए, आपकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। जम्मू में छत्तीसगढ़ के कई पर्यटक फंसे हुए हैं, इसे लेकर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि हमारी सरकार स्थिति पर निगरानी बनाए हुई है। सभी के साथ हम संपर्क में हैं। किसी भी पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं होगी।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कश्मीर में आमूलचूल परिवर्तन आया है। यह बात कुछ विघ्नकारी तत्वों को स्वीकार नहीं हो रही, क्योंकि कश्मीर के आम लोगों के जीवन में असली बदलाव और आर्थिक विकास हुआ है। उन्होंने इस माहौल को बिगाड़ने का प्रयास किया है, लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार पूरी तरह अडिग है और ऐसे लोगों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
दूसरे पोस्ट में उन्होंने लिखा, पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सीसीएस बैठक में 5 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सिंधु जल समझौते को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। अटारी बॉर्डर चेक पोस्ट को बंद कर दिया गया। पाकिस्तानी नागरिकों के भारत में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। भारत में स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग को बंद करने का निर्णय लिया गया। पाकिस्तानी राजनयिकों को 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश जारी किया गया। इस नृशंस आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।


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