“राज ठाकरे की ज़ुबान फिसली या सियासी चाल?” निशिकांत दुबे ने दी खुली चुनौती

Summary :

मुंबई में मराठी अस्मिता के मुद्दे को लेकर दिए गए एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राज ठाकरे ने हाल ही में उत्तर भारतीयों को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “अपने घर में तो सब शेर होते हैं।” इस बयान पर झारखंड से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने करारा जवाब देते हुए कहा, “अपने घर में तो कुत्ता भी शेर होता है। बिहार-यूपी आओ, पटक-पटककर मारेंगे।” राज ठाकरे के बयान पर मचा बवाल राज ठाकरे ने एक…

मुंबई में मराठी अस्मिता के मुद्दे को लेकर दिए गए एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

राज ठाकरे ने हाल ही में उत्तर भारतीयों को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “अपने घर में तो सब शेर होते हैं।” इस बयान पर झारखंड से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने करारा जवाब देते हुए कहा, “अपने घर में तो कुत्ता भी शेर होता है। बिहार-यूपी आओ, पटक-पटककर मारेंगे।”

राज ठाकरे के बयान पर मचा बवाल

राज ठाकरे ने एक जनसभा में बिना किसी का नाम लिए कहा था कि “कुछ लोग जब यहां (महाराष्ट्र) आते हैं तो शेर बन जाते हैं, लेकिन अपने राज्यों में कुछ नहीं बोलते।” इसे उत्तर भारतीयों के प्रति एक बार फिर से उनकी पुरानी विरोधी भावना के रूप में देखा जा रहा है।

इस बयान पर निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, “बिहार और यूपी के लोगों को महाराष्ट्र में गाली देना आसान है, लेकिन हिम्मत है तो मैदान में आकर बात करें।”

भाजपा ने दी चेतावनी, MNS ने दी सफाई

भाजपा नेताओं का कहना है कि राज ठाकरे का बयान समाज को बांटने वाला है और यह दो राज्यों के बीच वैमनस्य फैलाने की कोशिश है। वहीं, MNS के प्रवक्ता ने सफाई देते हुए कहा कि ठाकरे का बयान गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उनका इरादा किसी समुदाय को अपमानित करने का नहीं था।

राजनीतिक बयानबाजी या चुनावी रणनीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र में आगामी निकाय चुनाव और 2026 की तैयारी को देखते हुए राज ठाकरे एक बार फिर मराठी बनाम बाहरी की राजनीति को हवा देने की कोशिश कर रहे हैं। यह मुद्दा 2008 में भी उठ चुका है जब MNS कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीयों पर हमले किए थे। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी बहस जारी है। एक वर्ग ठाकरे की आलोचना कर रहा है तो वहीं कुछ लोग इसे क्षेत्रीय अस्मिता की आवाज बता रहे हैं।

Team Desk