कोरोना महामारी के बीच संसद के मॉनसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल न कराए जाने के केंद्र के फैसले का शिवसेना ने समर्थन किया। इसके साथ ही पार्टी ने महामारी के बीच ‘‘आपात स्थिति’’ के कारण लिए गए इस फैसले को सभी के द्वारा समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
शिवसेना के नेता संजय राउत ने पत्रकारों से कहा कि सरकार से सवाल करने के लिए अन्य मंच हमेशा उपलब्ध हैं। लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय की अधिसूचना के अनुसार मानसून सत्र में न तो प्रश्न काल होगा और न ही गैर सरकारी विधेयक लाए जा सकेंगे। कोरोना वायरस के कारण शून्य काल को भी सीमित कर दिया गया है।
राउत ने कहा, ‘‘भले ही संसद के मानसून सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा, लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसा क्यों है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह एक आपातकालीन स्थिति है। हमें समझने की जरूरत है न कि आलोचना करने की।’’ उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में राज्य विधानसभा का सत्र केवल दो दिन के लिए बुलाया जाएगा।
मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं कराये जाने की कई विपक्षी पार्टियों ने निंदा की है और कुछ नेताओं ने मोदी सरकार पर कोविड-19 महामारी के नाम पर ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ का प्रयास करने का भी आरोप लगाया है। जिसके बाद अब सांसद सरकार से लिखित में सवाल कर सकेंगे, जिनका जवाब भी लिखित में दिया जाएगा।


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