राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को महाराष्ट्र राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधा और कहा कि वे इसके बारे में चिंतित नहीं हैं। गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘बीजेपी और आरएसएस फासीवादी हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले की परवाह नहीं है।’
बीजेपी पर कई राज्य में सरकार गिराने का लगाया आरोप
इसके बाद, SC ने गुरुवार को कहा कि वह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार को अयोग्य नहीं ठहरा सकता है और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री के रूप में बहाल करने के लिए सबमिशन को खारिज कर दिया क्योंकि बाद में विधानसभा में शक्ति परीक्षण का सामना करने के बजाय इस्तीफा देना चुना था। बीजेपी पर निशाना साधते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि पार्टी ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सरकार गिराई। उन्होंने कहा, “उन्होंने (भाजपा) मप्र, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सरकार गिराई, हमारी (राजस्थान) सरकार बची, नहीं तो हमारे साथ भी यही स्थिति होती। लोगों को इन लोगों से खुद को बचाना चाहिए।” SC के फैसले के बाद, उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो लोग उनकी पार्टी छोड़ चुके हैं, उन्हें उनसे सवाल पूछने का कोई अधिकार नहीं है, और अगर एकनाथ शिंदे में कोई नैतिकता है तो उन्हें अपना इस्तीफा सौंप देना चाहिए।
16 विधायकों के दलबदल के मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया
इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने नबाम रेबिया मामले में अपने 2016 के फैसले को एक बड़ी बेंच को भेज दिया। शीर्ष अदालत जून 2022 में तत्कालीन उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना के 16 विधायकों के दलबदल के मामले में अपना फैसला सुना रही थी. ठाकरे गुट ने देश के दलबदल विरोधी कानून के तहत विधायकों की अयोग्यता की मांग की थी। ठाकरे गुट ने देश के दलबदल विरोधी कानून के तहत विधायकों की अयोग्यता की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि स्पीकर को अयोग्यता याचिकाओं पर उचित समय के भीतर फैसला करना चाहिए।
उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का नहीं किया सामना
शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्यपाल के भरोसे ऐसा कोई संवाद नहीं था जिससे यह संकेत मिलता हो कि असंतुष्ट विधायक सरकार से समर्थन वापस लेना चाहते हैं। राज्यपाल ने शिवसेना के विधायकों के एक गुट के प्रस्ताव पर भरोसा करके यह निष्कर्ष निकाला कि उद्धव ठाकरे अधिकांश विधायकों का समर्थन खो चुके हैं। इसने कहा कि यथास्थिति बहाल नहीं की जा सकती क्योंकि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया और अपना इस्तीफा दे दिया। इसलिए सबसे बड़े दल भाजपा के समर्थन से एकनाथ शिंदे को शपथ दिलाना राज्यपाल द्वारा उचित ठहराया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्लोर टेस्ट का इस्तेमाल अंतर और पार्टी के भीतर के विवादों को निपटाने के माध्यम के रूप में नहीं किया जा सकता है।


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