राजस्थान उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य पुलिस के विशेष अभियान दस्ते (एसओजी) को निर्देश दिया कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी मामले में केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को गिरफ्तार न करें।
उच्च न्यायालय ने एसओजी को अदालत की पूर्व मंजूरी के बिना शेखावत के खिलाफ कोई आरोपपत्र दाखिल करने से भी रोक दिया।
न्यायमूर्ति फरजंद अली ने यहां शेखावत को यह कहते हुए राहत दी कि दोनों पक्षों की ओर से दलीलें दी जानी थीं, जिसके लिए मामले की विस्तार से सुनवाई की आवश्यकता है और मामले की सुनवाई आठ जनवरी तक के लिए टाल दी। अदालत ने एसओजी को मामले की जांच जारी रखने की स्वतंत्रता प्रदान करते हुए निर्देश दिया कि यदि जांच के लिए शेखावत की आवश्यकता हो तो कम से कम 20 दिन पहले उन्हें नोटिस जारी किया जाए, चूंकि वह एक मौजूदा संसद सदस्य होने के अलावा एक सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति हैं जिनकी कई पेशेवर प्रतिबद्धताएं हो सकती हैं।
अदालत का यह निर्देश शेखावत की एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें उन्होंने अपनी मुख्य याचिका के लंबित रहने के दौरान आगे की जांच के साथ-साथ आरोपपत्र दाखिल करने पर रोक लगाने की मांग की थी। शेखावत ने अपनी याचिका में प्राथमिकी को चुनौती देने के अलावा मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने की मांग की है।
बिना मंजूरी के केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को गिरफ्तार न करे एसओजी : High Court
Summary :
राजस्थान उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य पुलिस के विशेष अभियान दस्ते (एसओजी) को निर्देश दिया कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी मामले में केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को गिरफ्तार न करें। उच्च न्यायालय ने एसओजी को अदालत की पूर्व मंजूरी के बिना शेखावत के खिलाफ कोई आरोपपत्र दाखिल करने से भी रोक दिया। न्यायमूर्ति फरजंद अली ने यहां शेखावत को यह कहते हुए राहत दी कि दोनों पक्षों की ओर से दलीलें दी जानी थीं, जिसके लिए मामले की विस्तार से सुनवाई की आवश्यकता है और मामले की सुनवाई आठ जनवरी तक…


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