अशोक गहलोत के लिए लाल डायरी बनी मुसीबत! क्या चुनाव पर दिखेगा बुरा असर?

Summary :

राजस्थान में साल के अंत होने से पहले चुनाव होने वाले हैं। जिसके लिए विपक्ष और बीजेपी -सरकार जी-तोड़ कोशिशों में जुट गयी है। राजस्थान में चुनावी शंखनाद बजने के बाद कई खुलासे हो रहे हैं, फिर चाहे इस बार दोनों पक्षों के बीच की वो लड़ाई हो या फिर लाल डायरी का इतिहास।

राजस्थान में साल के अंत होने से पहले चुनाव होने वाले हैं।  जिसके लिए विपक्ष और बीजेपी -सरकार जी-तोड़ कोशिशों में जुट गयी है। राजस्थान में चुनावी शंखनाद बजने के बाद कई खुलासे हो रहे हैं, फिर चाहे इस बार दोनों पक्षों के बीच की वो लड़ाई हो या फिर लाल डायरी का इतिहास।  इस बार ये चुनावी घमासान इतना बढ़ चुका है, की अशोक गहलोत के पार्टी के सदस्य ही उनपर सवाल उठा रहे हैं।  जी हाँ राजेश गुढ़ा ने अशोक गहलोत को राजस्थान में हो रहे महिलाओं के अत्याचकार पर रोक लगाने के लिए सवाल-जवाबों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। जी हाँ हम उसी लाल डायरी की बात कर रहे हैं जो आजकल राजस्थान के चुनावों में अशोक गकहलोट के गले का फांस बन गया है।  
लाल डायरी से बदल जाएगा चुनावी मुखौटा !
लाल डायरी ने चुनावी ज्वाला को बढ़ा दिया है।  और इसी लाल डायरी को बड़ा मुद्दा बनाते हुए विपक्षी पार्टी यानि बीजेपी अशोक गहलोत को घेरे में लेगी।   क्योंकि राजस्थान में हुई प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के भाषण में भी उन्होंने लाल डायरी का ज़िक्र किया था।  जहां पीएम मोदी ने कांग्रेस सरकार को लूट की दुकान बताया जिसमें उन्होंने सबसे बड़ा उदाहरण लाल डायरी कक दिया। उन्होंने कहा की लाल डायरी के नाम से कांग्रेस के बड़े नेताओं की हालत खराब है।  जहां उन्होंने खा की अगर लाल डायरी के एक -एक पन्ने  खुले तो बड़े-बड़े नेताओं के भी डब्बे गुल हो जाएंगे।  

राजेश गुढ़ा को किया मोहरे की तरह इस्तेमाल-अशोक गहलोत 
बीजेपी लाल डायरी के मुद्दे को विधानसभा चुनाव में जमकर उठाएगी।  लाल डायरी को लेकर अशोक गहलोत ने जवाब दिया है की ये सिर्फ एक कल्पना है , और राजेश गुढ़ा को एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।  लाल डायरी चाहे कल्पना हो या फिर हकीकत ये तो साफ़ नज़र आ रहा है की राजस्थान में विधानसभा चुनाव में ये मुद्दा बढ़चढ़ कर नज़र आएगा।  

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