Bharatpur News: करवाचौथ का त्योहार कई महिलाओं के लिए खुशियों और परिवार के साथ का प्रतीक होता है। लेकिन कुछ महिलाओं के लिए यह दिन पुरानी यादों और अपनों से मिलने की उम्मीद लेकर आता है। राजस्थान के भरतपुर स्थित ‘अपना घर आश्रम’ में इस बार करवाचौथ पर कुछ ऐसा ही भावुक नजारा देखने को मिलेगा। यहां रहने वाली 212 महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना करते हुए व्रत रखेंगी। इनमें कई महिलाएं ऐसी हैं, जिनके पति और परिवार को उनके आश्रम में होने की जानकारी मिलने के बाद भी वे उन्हें लेने नहीं पहुंचे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भरतपुर का ‘अपना घर आश्रम’ जरूरतमंद और बेसहारा महिलाओं को सहारा देता है। आश्रम में इस समय कुल 3,643 महिलाएं रह रही हैं। इनमें से 212 महिलाएं मानसिक रूप से स्वस्थ हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक अपने परिवार के पास वापस नहीं जा सकी हैं। इन महिलाओं के लिए करवाचौथ केवल पूजा-पाठ या व्रत रखने का दिन नहीं है। यह त्योहार उन्हें अपने पति, परिवार और पुराने जीवन की याद दिलाता है। कोई अपने पति के लौटने की उम्मीद लगाए बैठी है, तो कोई अपने बीते दिनों को याद करके त्योहार मनाने की तैयारी कर रही है।
426 महिलाएं भी लेंगी करवाचौथ के आयोजन में हिस्सा
- आश्रम में 426 महिलाएं ऐसी भी हैं, जो अभी पूरी तरह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हो पाई हैं।
- इनमें कई महिलाओं की याददाश्त वापस नहीं लौटी है। उन्हें अपने घर का पता तक मालूम नहीं है।
- इसके बावजूद करवाचौथ के त्योहार से उनका भावनात्मक जुड़ाव बना हुआ है।
- आश्रम प्रबंधन इन महिलाओं को भी आयोजन में शामिल करेगा। उनके लिए सजने-संवरने, पूजा की तैयारियों और त्योहार से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेने का मौका होगा।
- आश्रम का उद्देश्य है कि ये महिलाएं खुद को अकेला महसूस न करें और उन्हें परिवार जैसा माहौल मिल सके।
इस महिला की घर वापसी से जगी उम्मीद
- आश्रम में रहने वाली महिलाओं के बीच कुमकुम की कहानी उम्मीद जगाती है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के कोकड़ी गांव की रहने वाली कुमकुम को करीब 9 महीने पहले कोटा से रेस्क्यू करके आश्रम लाया गया था।
- आश्रम में रहते हुए जब उनकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ, तो उन्होंने अपने घर का पता बताया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से उनके परिवार तक पहुंचने का रास्ता बना।
- आश्रम की प्रशासनिक अधिकारी बबीता के मुताबिक, कुमकुम के पति प्रमोद चौहान हाल ही में उन्हें अपने साथ घर ले गए।
- कुमकुम की घर वापसी उन महिलाओं के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो अपने परिवार से दोबारा मिलने का इंतजार कर रही हैं।
इस साल 448 लोगों को परिवार से मिलाया गया
- आश्रम में इस साल अब तक 448 लोगों का पुनर्वास किया जा चुका है। इनमें 338 महिलाएं शामिल हैं।
- इनमें से 105 सुहागिनें भी अपने परिवार के पास लौट चुकी हैं। अब ये महिलाएं अपने घरों में परिवार के साथ करवाचौथ का त्योहार मनाएंगी।
- आश्रम के प्रयासों से हर साल औसतन 500 लोगों को उनके परिवार से मिलाने में सफलता मिलती है।
- इन प्रयासों का मकसद जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित माहौल देने के साथ उन्हें दोबारा अपने घर और अपनों तक पहुंचाना है।
40 ब्यूटीशियन करेंगी महिलाओं का श्रृंगार
- करवाचौथ के आयोजन को खास बनाने के लिए आश्रम में पिछले दो दिनों से तैयारियां चल रही हैं।
- इस मौके पर 40 ब्यूटीशियन की टीम 638 महिलाओं को सजाने-संवारने में जुटी है।
- उनके लिए कपड़ों, श्रृंगार और त्योहार से जुड़ी तैयारियां की जा रही हैं।
- आश्रम की संस्थापिका डॉ. माधुरी भारद्वाज के अनुसार, इन महिलाओं के मन में अलग-अलग भावनाएं हैं।
- किसी को अपने पति की याद आती है, तो किसी को अपना घर और परिवार याद आता है। त्योहार के दौरान इन भावनाओं को समझना और महिलाओं को अपनापन देना जरूरी है।
किसी को पति का इंतजार, तो किसी को परिवार से मिलने की आस
करवाचौथ की रात जब चांद निकलेगा, तो आश्रम में रहने वाली महिलाएं भी अपनी-अपनी भावनाओं के साथ पूजा करेंगी। कोई अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करेगी, तो कोई अपने परिवार से दोबारा मिलने की उम्मीद लगाए रखेगी।
इन महिलाओं के लिए यह आयोजन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि उन रिश्तों से जुड़े रहने का जरिया है, जो कभी उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा थे। आश्रम की कोशिश है कि इस खास दिन पर उन्हें खुशियां मिलें और वे खुद को अकेला नहीं, बल्कि एक परिवार का हिस्सा महसूस करें।


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