Garuda Purana Antim Sanskar Niyam: सनातन धर्म में गरुड़ पुराण का बहुत महत्व है। इसमें न केवल हमारे वर्तमान जीवन बल्कि मृत्यु और उसके बाद किए जाने वाले संस्कारों का उल्लेख भी मिलता है। अंतिम संस्कार से पहले शरीर को नहलाने, नए कपड़े पहनाने और थोड़ी देर के लिए जमीन पर लेटाने की परंपरा है। लेकिन, ऐसा क्यों होता है। आइए, जानते हैं कि शव को जमीन पर क्यों लेटाया जाता है।
पांच तत्वों से जुड़ाव
मोह का बंधन टूटना

जब तक शरीर आरामदायक बिस्तर पर रहता है, तब तक आत्मा का अपने घर और भौतिक सुखों से लगाव बना रहता है। शव को जमीन पर लेटा देने से आत्मा को यह अहसास होता है कि अब उसका सांसारिक जीवन समाप्त हो चुका है और उसे इस स्थान को छोड़कर अपनी आगे की यात्रा शुरू करनी है।
मिट्टी से जुड़ाव और सीख
शव को जमीन पर रखने की यह प्रथा जिंदा लोगों को एक बड़ी बात सिखाती है। यह याद दिलाती है कि दुनिया में कुछ भी हमेशा रहने वाला नहीं है। पैसा, पद और पहचान सब यहीं छूट जाते हैं, केवल इंसान के कर्म ही उसके साथ रहते हैं।
हिंदू धर्म में मौत को जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि आत्मा का एक नया सफर माना जाता है। शरीर को जमीन पर रखने का मतलब है कि दुनियादारी का काम खत्म हो गया है और अब यह शरीर वापस कुदरत को सौंपा जा रहा है।


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