Garuda Purana Antim Sanskar Niyam: मृत्यु के बाद जमीन पर क्यों लेटाते हैं शव? गरुड़ पुराण में छिपा है इसका गहरा रहस्य

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सनातन धर्म में गरुड़ पुराण का विशेष महत्व है, जिसमें मृत्यु और अंतिम संस्कार के नियमों का उल्लेख है। अंतिम संस्कार से पहले शव को स्नान कराकर, नए वस्त्र पहनाकर कुछ समय के लिए जमीन पर रखने की परंपरा है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण बताए गए हैं।

Garuda Purana Antim Sanskar Niyam: सनातन धर्म में गरुड़ पुराण का बहुत महत्व है। इसमें न केवल हमारे वर्तमान जीवन बल्कि मृत्यु और उसके बाद किए जाने वाले संस्कारों का उल्लेख भी मिलता है। अंतिम संस्कार से पहले शरीर को नहलाने, नए कपड़े पहनाने और थोड़ी देर के लिए जमीन पर लेटाने की परंपरा है। लेकिन, ऐसा क्यों होता है। आइए, जानते हैं कि शव को जमीन पर क्यों लेटाया जाता है।

पांच तत्वों से जुड़ाव

सनातन धर्म के अनुसार, हमारा शरीर पांच चीजों से मिलकर बना है- धरती, पानी, आग, हवा और आसमान। ऐसा माना जाता है कि इंसान की मौत के बाद उसका शरीर वापस इन्हीं पांचों तत्वों में मिलने लगता है। अंतिम संस्कार से पहले शरीर को जमीन पर लेटाना इस बात का संकेत है कि शरीर वापस प्रकृति की तरफ लौट रहा है। इसका अर्थ है कि जिस धरती पर इंसान जिंदगी भर रहा, मौत के बाद उसका शरीर उसी धरती की गोद में वापस जा रहा है।

मोह का बंधन टूटना

dead body
dead body (source: social media)

जब तक शरीर आरामदायक बिस्तर पर रहता है, तब तक आत्मा का अपने घर और भौतिक सुखों से लगाव बना रहता है। शव को जमीन पर लेटा देने से आत्मा को यह अहसास होता है कि अब उसका सांसारिक जीवन समाप्त हो चुका है और उसे इस स्थान को छोड़कर अपनी आगे की यात्रा शुरू करनी है।

मिट्टी से जुड़ाव और सीख

शव को जमीन पर रखने का एक संदेश यह भी है कि इंसान जिंदगी में चाहे जितना पैसा, नाम या बड़ा पद पा ले, आखिर में उसका शरीर मिट्टी में ही मिल जाना है। यह परंपरा हमें घमंड न करने और हमेशा अपनी सच्चाई से जुड़े रहने की सीख देती है।

शव को जमीन पर रखने की यह प्रथा जिंदा लोगों को एक बड़ी बात सिखाती है। यह याद दिलाती है कि दुनिया में कुछ भी हमेशा रहने वाला नहीं है। पैसा, पद और पहचान सब यहीं छूट जाते हैं, केवल इंसान के कर्म ही उसके साथ रहते हैं।

हिंदू धर्म में मौत को जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि आत्मा का एक नया सफर माना जाता है। शरीर को जमीन पर रखने का मतलब है कि दुनियादारी का काम खत्म हो गया है और अब यह शरीर वापस कुदरत को सौंपा जा रहा है।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।