Pret Yoni in Garuda Purana: मरने के बाद आत्मा प्रेत कब बनती है? जानिए गरुड़ पुराण के चौंकाने वाले नियम

Summary :

गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति के कर्म ही मृत्यु के बाद उसकी आत्मा की गति निर्धारित करते हैं। जो लोग बहुत बुरे कर्म करते हैं, उन्हें 'प्रेत योनि' मिलती है। प्रेत योनि मुख्य रूप से उन आत्माओं को प्राप्त होती है जिनकी मृत्यु समय से पहले या किसी दुर्घटना (जैसे डूबने, जलने या भारी वस्तु के नीचे दबने) में हो जाती है, और जिनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार व श्राद्ध कर्म सही समय पर पूरे नहीं हो पाते। ऐसे में आत्मा शांति न मिलने के कारण भटकती रहती है।

Pret Yoni in Garuda Purana: सनातन धर्म में गरुड़ पुराण का बहुत महत्व है। गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 मुख्य पुराणों में से एक है। इसमें न केवल हमारे वर्तमान जीवन बल्कि मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्ति के बारे में बहुत गहराई से समझाया गया है। इस ग्रंथ में समझाया गया है किआप जैसे काम करेंगे, मृत्यु के बाद वैसा ही फल मिलेगा। इसलिए गरुड़ पुराण से डरने की जगह बुरे कामों से बचना चाहिए और अच्छे काम करने चाहिए। आइए, जानते हैं कि किन लोगों की आत्मा को मृत्यु के बाद प्रेत योनि में जाना पड़ता है और ऐसा क्यों होता है।

प्रेत योनि किन लोगों को मिलती है?

Garuda Purana
Garuda Purana (AI Generated)

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को कोई न कोई रूप जरूर मिलता है, चाहे वह इंसान का हो, कीड़े-मकोड़ों का हो या पेड़-पौधों का। कुल 84 लाख योनियां होती हैं। आपकी आत्मा को कौन सा रूप मिलेगा, यह आपके कर्म तय करते हैं। बहुत अच्छे कर्म करने वालों को मोक्ष मिल जाता है, और थोड़े कम अच्छे कर्म करने वाले दूसरे रूपों में जन्म लेते हैं। लेकिन जो लोग बहुत बुरे काम करते हैं, उन्हें प्रेत योनि मिलती है।

किन कर्मों के लिए मिलती है प्रेत योनि

प्रेत योनि मुख्य रूप से उन लोगों की आत्माओं को मिलती है जिनकी मौत समय से पहले या किसी दुर्घटना में हो जाती है। उदाहरण के लिए, जो लोग पानी में डूबकर मर जाते हैं, जिनके ऊपर कोई भारी पेड़ गिर जाता है या जिनकी मौत आग में जलने के कारण होती है, उन्हें अक्सर प्रेत योनि में जाना पड़ता है। ऐसी मौतों के बाद अक्सर सही समय पर धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म नहीं हो पाते हैं। हालांकि, जब मृत व्यक्ति के परिवार वाले गरुड़ पुराण के नियमों के अनुसार उसके अंतिम संस्कार और तर्पण के कार्य सही तरीके से पूरे कर देते हैं, तो आत्मा को प्रेत योनि से छुटकारा मिल जाता है। अगर ये धार्मिक कार्य पूरे न किए जाएं, तो आत्मा शांति न मिलने के कारण इधर-उधर भटकती रहती है।

इन कर्मों को करने से बचें

जो लोग अपने जीवन में दूसरों का हक मारते हैं, किसी भूखे या प्यासे इंसान से उसका अन्न और पानी छीन लेते हैं, या धोखे और चालाकी से दूसरों का धन हड़प लेते हैं, उन्हें अपने इन भारी पापों का दंड भुगतने के लिए मरने के बाद प्रेत योनि में भटकना पड़ता है। इसलिए हर इंसान को गलत और पापी कामों से हमेशा दूर रहना चाहिए। अपने जीवन में हमेशा दूसरों की मदद, सेवा और भलाई के काम करने चाहिए। अच्छे और पुण्य कर्म करने से इंसान आत्मा के भटकने और प्रेत योनि के कष्टों से पूरी तरह बच जाता है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।