Suresh Raina on MS Dhoni: पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना ने इंटरनेशनल क्रिकेट से MS धोनी के साथ ही रिटायर होने के अपने फ़ैसले के बारे में बात की. दोनों क्रिकेटरों ने लंबे समय तक भारतीय टीम और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर किया था और दोनों ने 15 अगस्त, 2020 को इंटरनेशनल क्रिकेट से एक ही दिन रिटायरमेंट लिया. धोनी ने 7:29 बजे अपने रिटायरमेंट का ऐलान किया और रैना ने भी उनके बाद ऐसा ही किया.
Suresh Raina on MS Dhoni

पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा से बात करते हुए रैना ने बताया कि धोनी उस फ़ैसले से हैरान रह गए थे जिसमें रैना ने तय किया था कि वह भी उसी दिन रिटायर होंगे जिस दिन महान खिलाड़ी एमएस धोनी रिटायर होंगे. हाल ही में रैना ने इसको लेकर खुलासा करते हुए कहा:
“खेल तो ऐसा ही है, है ना? एक खिलाड़ी के तौर पर आप इसी के लिए जीते हैं. आप देश के लिए बहुत कुछ करते हैं. माता-पिता ने भी बहुत त्याग किया होता है, लेकिन उस पल मुझे लगा कि यही सबसे सही फ़ैसला है. क्योंकि ये सब चीज़ें होती रहती हैं, और आप अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं. उस समय मेरी उम्र चाहे 32 रही हो या 33, जो भी हो. लेकिन जब उन्होंने रिटायरमेंट का फ़ैसला लिया, तो मैं ड्रेसिंग रूम में गया और कहा, ‘हो गया.’ उन्होंने कहा, ‘ये क्या किया तूने?'”
दोनों दिग्गजों ने यह घोषणा तब की थी जब वे CSK के बायो-बबल में थे और IPL के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जाने की तैयारी कर रहे थे. IPL का आयोजन COVID-19 महामारी के कारण सितंबर और नवंबर के बीच हुआ था.

रैना ने धोनी के साथ अपने रिश्ते के बारे में भी बात की और बताया कि कप्तान ने बड़ी सहजता से अपनी बल्लेबाजी की जगह छोड़ दी ताकि वह ऊपर के क्रम में बल्लेबाजी कर सकें।
“मुझे लगता है कि उस समय आप कप्तान के लिए खेलते थे. आप टीम के लिए खेलते थे. लेकिन मैंने ‘कप्तान’ क्यों कहा? क्योंकि मुझे लगता है कि बल्लेबाजी की उस जगह पर मुझे मौका मिला. कप्तान ने अपनी जगह का त्याग किया. जब दादा कप्तान थे, तब वह ऊपर के क्रम में बल्लेबाजी करते थे, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी लेते हुए कहा, ‘युवी पापा (युवराज सिंह), आप ऊपर जाइए, सुरेश, आप यहां खेलिए, मैं यहां बैठा हूं.”
इसके अलावा, रैना ने धोनी के उस भाव के बारे में बताया जिससे उन्हें अतिरिक्त प्रयास करने और टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली.
उन्होंने कहा,

“तो मैंने सोचा कि अगर यह व्यक्ति अपनी काबिलियत से ज़्यादा मुझ पर भरोसा दिखा रहा है, तो मुझे उसके लिए अच्छा खेलना होगा. हम सब टीम का हिस्सा हैं. मैंने कहा कि मैं पूरे दिल से खेलूँगा—चाहे फ़ील्डिंग हो या बॉलिंग. इसीलिए मुझे लगता है कि जब आप ऐसे मुकाम पर पहुँचते हैं, तो आप दिमाग से नहीं सोचते; आप भावुक हो जाते हैं और दिल से सोचते हैं. जहाँ दिल जुड़ जाता है, उसके बाद चाहे दोस्ती हो… बात वही है; आप सालों-साल खेलते हैं और चीज़ों का भरपूर मज़ा लेते हैं.”
“आप जानते हैं कि वह इंसान के तौर पर कैसे हैं. लेकिन मुझे लगता है कि अगर कोई आपके लिए इतनी कुर्बानी देता है, तो आपमें भी… कुछ वापस करने की क्षमता होनी चाहिए. क्योंकि पैसा तो सबके पास होता है, लेकिन उसे खर्च करने के लिए बड़ा दिल चाहिए. तो दोस्ती के लिए हमारे पास वह दिल था, और वह हमेशा रहेगा.”
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