Allahabad High Court Live-in Relationship Ruling: इलाहाबाद उच्च न्यायालय अपने फ़ैसलों के कारण अक्सर सुर्खियों में रहता है। एक मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर दो लोग अलग-अलग धर्म के हैं और साथ (लिव-इन) में रहना चाहते हैं, तो यह कानून के खिलाफ नहीं है। इसे अपराध नहीं माना जाएगा। यह मामला एक ऐसे जोड़े (कपल) का था, जो अपनी सुरक्षा के लिए न्यायलय तक पहुंचा था। कोर्ट ने उनकी बात सुनते और समझते हुए बड़ा फैसला सुनाया और उन्हें राहत देते हुए कहा कि संविधान ऐसे रिश्तों को मना नहीं करता।
कोर्ट ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाई कोर्ट (HC) ने इन मामलों में सुनवाई करते हुए बताया कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (भेदभाव का निषेध) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से जीवन जी सकता है। अगर कोई अन्य धर्म के लोग एक साथ रहते हैं यानी Live-in relationship में रहते हैं, तो यह अपराध नहीं है। इसे किसी भी प्रकार का कानूनी अपराध नहीं माना जाएगा।
कोर्ट के फैसले को आसान भाषा में समझें:
अलग-अलग धर्म के लोग Live-in relationship रह सकते हैं.
Live-in relationship गैरकानूनी नहीं है.
इसके लिए किसी भी प्रकार की सजा नहीं दी जा सकती है।
कोर्ट का कड़ा रुख
जब तक दोनों व्यक्ति वयस्क हैं और अपनी स्वतंत्र इच्छा से साथ रह रहे हैं, तब तक उनका रिश्ता कानून की सीमाओं के भीतर वैध है। इसे किसी प्रकार से अवैध नहीं माना जाएगा। इसके लिए कोई सजा नहीं है।
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